
शिमला। प्रदेश पुलिस में भर्ती होने वाले जवानों के लिए अब ट्रेनिंग का स्तर बढ़ जाएगा। राजधानी सहित प्रदेश के तीन जिलों में नई पुलिस ट्रेनिंग अकादमियां खोली जाएंगी। इनके लिए जगह का चयन किया जा चुका है। शिमला के अलावा ये मंडी और धर्मशाला में खुलेेंगी। प्रदेश में 16 हजार 856 जवान हैं, जबकि 2100 पद अभी भी खाली हैं। खाली पद भरने को दूसरे और तीसरे वर्ष भर्तियां होती हैं।
हिमाचल पुलिस के जवानों की ट्रेनिंग को और स्तरीय बनाने के लिए अकादमी खोलने का फैसला किया है। इसके लिए पुलिस विभाग ने 14वें वित्तायोग के तहत केंद्र सरकार को 650 करोड़ रुपये का प्रपोजल बनाकर भेजा है। पुलिस विभाग के अनुसार इन अकादमियों में ट्रेनिंग को लेकर आधुनिक सुविधाएं होंगी। वर्तमान में केवल डरोह में ही पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज है। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के मुकाबले हिमाचल पुलिस के जवानों को दी जाने वाली ट्रेनिंग का स्तर कम है। पुलिस ट्रेनिंग अकादमियों के अलावा आवासीय सुविधाओं के संबंध में भी प्रपोजल भेजा गया है। पीटीसी डरोह में नए भर्ती हुए जवानों की ट्रेनिंग के अलावा डिपार्टमेंटल और प्रमोशनल कोर्सिस होते हैं। साल भर इस कॉलेज में ट्रेनिंग का दौर चला रहता है। इनमें कांस्टेबल से लेकर डीएसपी रैंक तक के अधिकारियों का प्रशिक्षण शामिल है।
तीन माह से खाली आईजी का पद
प्रदेश पुलिस के एकमात्र ट्रेनिंग कॉलेज डरोह में आईजी का पद तीन महीने से अधिक समय से खाली है। आईजी जीडी भार्गव की आईजी एसआर की 29 अप्रैल को नियुक्ति होने के बाद से यह पद खाली है। आईजी एनआर राकेश अग्रवाल को पीटीसी का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है।
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14वें वित्तायोग को प्रपोजल बनाकर भेजा है। इसमें ट्रेनिंग अकादमियों के अलावा आवास की सुविधाएं भी शामिल हैं। ट्रेनिंग अकादमियों के खुलने से जवानों के ट्रेनिंग स्तर में और इजाफा होगा।
– एपी सिद्दकी, आईजी आर्म्ड पुलिस एंड ट्रेनिंग।
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बेसिक ट्रेनिंग भी पूरी नहीं हो पाते
जो नई भर्तियां होती हैं, हम उनकी बेसिक ट्रेनिंग भी नहीं कर पाते। इसके अलावा रिफ्रेशर कोर्स, डिजास्टर मैनेजमेंट कोर्स, डिपार्टमेंटल कोर्सिस प्रभावित होते हैं। नई अकादमियां खुलने से ट्रेनिंग का स्तर और बढ़ेगा।
