
बिलासपुर। हिम कल्याण लोक कला मंच की मासिक कला गोष्ठी शहर के साथ लगते बामटा में साकेत धाम में आयोजित की गई। सेवानिवृत्त शिक्षाविद अमरनाथ धीमान की अध्यक्षता में आयोजित यह गोष्ठी काला बाबा के नाम से प्रसिद्ध रहे लोकपूज्य दिवंगत संत बाबा कल्याण दास को समर्पित रही। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से खूब रंग जमाया।
कला गोष्ठी का आगाज जंगल-सुंगल की गायत्री ने भजन से किया। उनके भजन ‘बिरथा जनम गंवाया कुछ सोच बंदेया’ को खूब सराहा गया। दयोथ की रुचि भिराली ने आपसी मतभेदों व ईर्ष्या भाव को दूर करने का संदेश देते हुए कहा, ‘तन चमकाया चंदन सा, मन को देखो है मैला, मन को करके साफ कर अरदास, मां मिल जाएगी।’ देलग के मनशाराम ने ‘प्रारब्ध’ शब्द का व्याख्यान करते हुए कहा कि किसी के प्रारब्ध को कोई छीन नहीं सकता। घुमारवीं के रामचंद ने ‘भंडारा लगया तेरे द्वार माता, खांदियां जावे संगतां’ भेंट सुनाई।
बरठीं के प्यारेलाल ने सुंदर लेखन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लिखावट लेखक के व्यक्तित्व का आइना होती है। सायर डोभा की राजकमल ने काला बाबा को समर्पित भजन सुनाते हुए कहा, ‘बाबा जी दी होंदी थी जै-जैकार।’ जगदीश जमथली ने ‘कल्याण बाबा, तुम्हारी शक्तियों का नहीं कोई ज्ञाता’ भजन सुनाया। नम्होल की पिंकी शर्मा ने चित्रकला में अपना हुनर दिखाया। वहीं, बध्यात के सुरेंद्र मिन्हास ने नलवाड़ी मेले पर आधारित ‘मेले जो तू आई जायां, इक फेरा पाई जायां’ गीत की प्रस्तुति दी। बामटा की गरिमा ने ‘देहरा में है एक छोटा रियाल’ कविता सुनाई। कार्यक्रम का समापन अमरनाथ धीमान की रचना ‘मां सरस्वती तुझे शत-शत प्रणाम’ से हुआ।
