
शिमला। पिछले एक साल के दौरान राजधानी की सूरत बदलने के लिए कई ड्रीम प्रोजेक्ट बनाए गए लेकिन आगामी संभावनाओं को ध्यान में नहीं रखा गया। इसके चलते अधिकांश ड्रीम प्रोजेक्ट शहरवासियों के लिए सपना ही बनकर रह गए हैं। शहर में मोनो रेल चलाने की बात हो, स्वचलित सीढ़ियां लगाना, पर्सनल रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम, रोप वे, माल रोड और रिज मैदान को यूरोप की तर्ज पर संवारना, पारदर्शी बसें चलाना, लिफ्ट लगाना तथा पार्किंग बनाना सहित कई अन्य योजनाएं, जिनको लेकर पिछले एक साल में खूब हल्ला तो मचा लेकिन सभी स्कीम अभी तक कहीं न कहीं फंसी हुई हैं।
मोनो रेल प्रस्ताव दो माह बाद ही नकार दिया
प्रदेश में मोनो रेल चलाने की घोषणा करने के करीब दो माह बाद सरकार ने इस प्रस्ताव को नकार दिया है। तर्क दिया गया है कि प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए शिमला में मोनो रेल चल पाना संभव नहीं है। मोनो रेल एक रेल आधारित परिवहन प्रणाली है। इसके तहत जमीन पर पिल्लर की व्यवस्था से रेल के लिए ऊंचाई पर विशेष मार्ग का निर्माण किया जाता है। रेल इसी विशेष मार्ग पर जमीन की सतह से काफी ऊंचाई पर चलती है।
अब पब्लिक रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम
मोनो रेल के बजाय सरकार ने अब पब्लिक रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (पीआरटीएस) अपनाने का निर्णय लिया है। पीआरटीएस सिस्टम परिवहन व्यवस्था का एक हिस्सा है। इसमें चार से छह लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। इससे परिवहन व्यवस्था में सुधार होने का दावा किया गया है।
स्वचलित सीढ़ियां फाइलों में कैद
शिमला में मेट्रो सिटी की तर्ज पर स्वचलित सीढ़ियां (एस्केलेटर) लगाने की नगर निगम ने घोषणा की थी। केंद्र सरकार को इस योजना को बनाकर मंजूरी केे लिए भेजा गया है लेकिन अभी तक यह फाइलों में ही कैद हो कर रह गई है। दावा किया गया था कि स्वचलित सीढ़ियां लगने से ओल्ड बस स्टैंड, लोअर बाजार और लक्कड़ बाजार बस स्टैंड से माल रोड तक पहुंचना आसान हो जाएगा।
यूरोप जैसा दिखना था माल रोड और रिज
ब्रिटिशकाल में देश की शीतकालीन राजधानी शिमला के ऐतिहासिक माल रोड और रिज मैदान को यूरोपियन लुक देने का दावा किया गया है। नगर निगम ने स्कैंडल प्वाइंट, रिज मैदान और माल रोड पर रंगीन पत्थर लगाने की बात कही थी। एशियन डेवलेपमेंट बैंक इस योजना को फाइनेंस कर रहा है। इस योजना के लिए धनराशि का इंतजाम भी कर लिया गया लेकिन न जाने किन कारणों के चलते अभी तक इस प्रस्ताव पर काम शुरू नहीं हो पाया है।
बिना छत की बसें चलाने का दावा भी हवा
लंदन और पेरिस की तर्ज पर हिल्स क्वीन शिमला में भी बिना छत की बसें चलाने का दावा किया गया था। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) ने घोषणा करते समय कहा था कि इन बसों में बैठ कर सैलानी जहां शिमला के सौंदर्य को करीब से निहार पाएंगे वहीं उनके लिए फोटोग्राफी करना भी आसान हो जाएगा। इन बसों में सैलानियों की सुविधा के लिए गाइड का भी बंदोबस्त करने की बात कही गई थी। इसके अलावा बसों में एलसीडी स्क्रीन लगाने की बात भी कही थी लेकिन यह योजना भी अभी चालू नहीं हो सकी है।
अधर में जाखू रोप वे प्रोजेक्ट
वर्ष 2003 में जाखू रोपवे को बनाने के लिए जैक्सन कंपनी की ओर से निर्माण कार्य शुरू किया गया था मगर कई तरह की स्वीकृतियां लेने के बावजूद किसी न किसी कारणवश प्रोजेक्ट के कार्य में बाधा आती रही। इस निर्माण के लिए कंपनी की ओर से जो 11 मंजिला ढांचे का निर्माण किया गया, उसमें दो मंजिल को स्वीकृत प्लान के विपरीत पाया गया। इस कारण यह प्रोजेक्ट अभी तक औपचारिकताओं में ही उलझा हुआ है। बीते दिनों हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जाखू रोपवे के निर्माण को हरी झंडी दी है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा डेविएशन पर तय की गई कंपाउंडिंग फीस को जैक्सन रोप वे कंपनी द्वारा जमा करने के दृष्टिगत ये आदेश पारित कर सरकार के निर्णय पर अपनी मोहर लगा दी है। इस तरह लंबे समय से अधर में लटके इस प्रोजेक्ट की अब शीघ्र शुरू होने की आस है।
