
कोटली (मंडी)। आईआरडीपी परिवार से संबंधित छात्रों के अभिभावकों को सरकार की ओर से मिलने वाली सालाना डेढ़ सौ रुपये छात्रवृत्ति पाने के लिए अपने जेब से दो से तीन गुना अधिक खर्च करना पड़ रहा है। औपचारिकताएं पूरी करने में पेरेंट्स का 300 से 400 रुपये खर्च हो रहा है।
सरकार की ओर से प्राथमिक पाठशालाओं में पढ़ने वाले आईआरडीपी वर्ग से संबंधित विद्यार्थियों को सालाना 150 रुपये सालाना छात्रवृत्ति दी जाती है। छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से पात्र छात्रों से औपचारिकताएं पूरी करवाई जाती हैं। इन पर तीन गुना अधिक खर्च करना पड़ रहा है। गरीब परिवारों के लिए यह योजना आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया साबित हो रही है।
साइगलू खंड के प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान जोध सिंह, महासचिव नरेश तथा उपाध्यक्ष खूब राम का कहना है कि पिछले कई साल से आईआरडीपी प्रमाण पत्र जमा करने पर छात्रों को छात्रवृत्ति मिल जाती थी। अब आईआरडीपी प्रमाण पत्र के साथ ही हिमाचली बोनाफाइड, बैंक खाते की पास बुक तथा आधार कार्ड जमा करवाने पड़ रहे हैं। उपनिदेशक कार्यालय की ओर से एक सप्ताह के भीतर सभी औपचारिकताएं जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। अभिभावक औपचारिकताएं पूरी करने में असमर्थता जता रहे हैं और छात्रवृत्ति की राशि पांच सौ से एक हजार तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
इस संबंध में प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक रमेश कुमार विद्यार्थी ने कहा कि बैंक खाता इसलिए आवश्यक किया गया है, ताकि छात्रवृत्ति की राशि सीधे लाभार्थी छात्र के खाते में जाए। इसके लिए आधार कार्ड भी जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि हिमाचली बोनाफाइड पहले नहीं लिया जाता था। यदि कोई नया नियम बनाया होगा तो इस बारे में उच्च अधिकारियों से बात करेंगे।
