डेढ़ माह में इस्टीमेट ही बना

कर्णप्रयाग। आपदा में क्षतिग्रस्त पैदल संपर्क मार्गों को मनरेगा के तहत खोलने के प्रयास धरातल पर नहीं उतर पा रहे हैं। स्थिति यह है कि आपदा के डेढ़ माह बाद विभाग की ओर से केवल आगणन तैयार किया गया है। वहीं मार्ग बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों का जनजीवन पटरी पर लौट नहीं पा रहा है।
आपदा से विकासखंड में 66 पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए थे, जबकि 23 जुलाई के बाद हुई बारिश से क्षतिग्रस्त मार्गों की संख्या अब 100 के पार पहुंच गई है। सरकारी निर्देशों के मुताबिक मनरेगा के तहत मार्गों को खोलने की जिम्मेदारी विकास विभाग को मिली है, लेकिन डेढ़ माह बाद भी मार्ग नहीं खुल पाया है। स्थिति यह है कि ग्रामीण क्षतिग्रस्त मार्गों पर जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं।

इन गांवों के पैदल मार्ग हैं क्षतिग्रस्त
ब्लाक के स्वर्का, चमाली, डोठंला, धल, मैखुरा, सेरागाड़, स्यान, बणसोली, नौली, हिंडोली, सुनाली, कंडारा, जेटी, हरकोटी, देवलीबगड़, सिंलगी, उल्फाड़ा, सैंज, मोली, घरकूड़ी, गनोली, कांचुला, नौसारी, तेफना, थिरपाक सहित अन्य गांवों के 100 से अधिक पैदल संपर्क मार्ग ध्वस्त हैं।

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