
ठियोग (रामपुर बुशहर)। ठियोग में परिवहन निगम के बस चालकों की मनमानी लगातार जारी है। ठियोग चेरी मार्ग पर पिछले दिनों हुए बस हादसे में ओवर लोडिंग के कारण 15 लोगाें को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। ओवरलोडिंग की मुख्य वजह लांग रूटों की बसों में लोकल सवारियों को न बिठाना बताया गया था। अभी भी बस चालक बिना एंट्री करवाए और सवारियों को बिठाए ही यहां से गुजर जाते हैं। हालांकि बीते दिनों दुर्घटना के बाद परिवहन मंत्री को भी यहां की जनता ने अवगत करवाया था कि चालक ठियोग बस अड्डे पर बस रोके बिना ही आगे निकल जाते हैं। इस कारण लोगाें को ओवर लोडिंग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस पर मंत्री ने यहां लांग रूट को बसों को रोकने के आदेश दिए थे, लेकिन बावजूद इसके बसें नहीं रुक रही हैं। हादसे के कई दिनों बाद जब इंडियन बुलेटिन ने परिवहन कार्यालय का दौरा किया तो पता चला कि आज भी हालात वैसे ही हैं। कार्यालय में खाली पड़े रजिस्टर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि बस अड्डे में यहां से गुुजरने वाली बसों की एंट्री नहीं होती। जिसके चलते लोकल रूट की बसों में ज्यादा भीड़ हो जाती है, जो कहीं न कहीं हादसों को न्योता देने की ओर साफ संदेश दे रही है। परिवहन मंत्री के निर्देशानुसार यहां से गुजरने वाली सभी बसों को बस अड्डे में एंट्री करवानी जरूरी है, लेकिन बावजूद इसके चालक और परिचालक आदेशों को ठेंगा दिखा कर ठियोग से गुजर जाते हैं। गौर हो कि यहां से रोजाना आनी डिपो की छह बसें, रामपुर की दस बसें, रिकांगपिओ की 11 बसें और रोहडू डिपो की 15 बसें गुजरती हैं। जब रजिस्टर के रिकार्ड को देखा गया तो पता लगा कि यहां एक आधा बस ही एंट्री करवा रही है। यहां बस का इंतजार कर रहे अभय कंवर, पंकज ठाकुर, मीना, हरविंद्र ठाकुर, जगदीश वर्मा, राकेश वर्मा, अनिता, कांता ने बताया कि लांग रूट की बसें यहां नहीं रुकती। इस कारण गंतव्य तक पहुंचने में कई बार देरी हो जाती है और यदि बसें मिलती भी है तो उनमें अधिक भीड़ रहती है और मजबूरी में उन बसों में ही सफर करने को मजबूर होना पड़ता है।
क्या कहना है निदेशक का
प्रदेश परिवहन निगम के निदेशक रितेश चौहान ने बताया कि ऊपरी शिमला के ठियोग बस अड्डे में सभी बसों की एंट्री करवाने के आदेश जारी किए गए हैं, यदि कोई चालक उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
एमडी क्या बोलते है
निगम के एमडी आरएन बत्ता ने बताया कि ऐसा करने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी अभी तक उनके जहन में ऐसी कोई बात नहीं थी।
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हां भई रामुपर वाले ही चढ़ना
बस परिवहन की हो यो या फिर निजी इनके परिचालक बसों को भले की ठियोग होकर ले जाना पसंद करते है लेकिन छोटे स्टेशन की सवारियों को नहीं ले जाते, कहते हैं कि रामपुर वाले की बैठना। सवारियों की इस परेशानी को देखने में न तो विभाग आगे आता है ओर न ही कोई प्रशासन।
