
सहारनपुर। आतंकी और बम गुरू अब्दुल करीम उर्फ टुंडा की गिरफ्तारी के बाद सहारनपुर पुलिस भी सक्रिय हो गई है। पुलिस को टुुंडा के सहारनपुर कनेक्शन के संकेत मिले हैं। चार राज्यों की सीमाओं से जुड़ा सहारनपुर जिले का नाम अक्सर आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने के कारण चर्चा में रहा है। ऐसे में संदिग्धों की तलाश में यहां पुलिस ने भी अपने सर्विलांस को एक्टिव कर दिया है। आतंकी गतिविधियों के मामले में सहारनपुर की सक्रियता भी कई बार सामने आई है। कंधार कांड से पहले यहां विदेशी नागरिकों को बंधक बनाकर लश्कर-ए-तैयबा के मौलाना मसूद अजहर को छुड़ाने की कोशिश की गई थी। उस समय पांच ब्रिटिश और एक आस्ट्रेलियन नागरिक का अपहरण किया गया था। आस्ट्रेलियन नागरिक की हत्या कर उसके फोटो प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दिये गये थे। इसके बाद गाजियाबाद में पुलिस के हत्थे चढ़ा अहमद सईद शेख उर्फ रोहित शर्मा से जानकारी मिली थी कि अपहृत विदेशी नागरिकों को सहारनपुर के खाताखेड़ी में रखा गया था। इस पर साहिबाबाद थाने के इंस्पेक्टर ध्रुवलाल यादव ने 2 नवंबर, 1994 को सहारनपुर पुलिस को साथ लेकर आंतकियों से मुठभेड़ की थी। इसमें ध्रुव लाल यादव और एक सिपाही राजेश यादव शहीद हो गये थे। एक आतंकी भी मारा गया था। सभी विदेशी नागरिकों को सकुशल छुड़ा लिया गया था।
यहां नाकाम रहे संगठन ने बाद में इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण किया था। यात्रियों की सकुशल रिहाई के बदले तत्कालीन राजग सरकार को न केवल मौलाना मसूद अजहर को छोड़ना पड़ा था बल्कि गाजियाबाद में पकड़े गये उमर सईद शेख को भी रिहा करना पड़ा था। तीन साल पहले शहर के पंजाबी बाग हकीकत नगर में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में शाहिद इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल को गिरफ्तार किया गया था। उसने न यहां राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिए थे और बाइक के लिए लोन तक ले लिया था। फिलहाल वह पंजाब की पटियाला जेल में बंद है और सहारनपुर की कोर्ट सुनवाई चल रही है। जनवरी, 2010 में रुड़की के गंगनहर थाना पुलिस के साथ एटीएस, एसटीएफ द्वारा पकड़े गये आईएसआई एजेंट आबिद अली उर्फ असद अली उर्फ अबू बकर उर्फ अजीत सिंह निवासी हंजरवाल, थाना ठोकर न्याजबेग, लाहौर से भी गोपनीय दस्तावेज और रुड़की छावनी का नक्शा बरामद हुआ था। उसने सहारनुपर के छुटमलपुर में रहकर यह जानकारियां एकत्र की थी। मार्च, 2010 को मुंबई में आतंकी संगठन लश्कर के रियाज के अब्दुल लतीफ को मुंबई एटीएस ने पकड़ा था। उसके पास से सहारनपुर और मऊ के फोन नंबर मिले थे।
तीन पाकिस्तानी भी लापता
सहारनपुर। 15 साल पहले सहारनपुर आए तीन पाकिस्तानी लापता हैं, जिनका आज तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। इनमें मोहल्ला शाहनूरजी में 15 साल पहले आये जन्नत अली एवं देवबंद आये शफी मोहम्म्द भी लापता है। 1996 में मोम्म्मद युसूफ उर्फ फिरोज को पकड़ लिया था। कोर्ट ने उसे सीमापार छोड़ने के आदेश दिये थे, लेकिन वह रात में लाकअप काटकर फरार हो गया था। उसका भी कोई सुराग नहीं है।
हमें टुंडा के सहारनपुर कनेक्शन के कुछ संकेत मिले हैं। पिछली आतंकी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस बेहद अलर्ट है। हम दिल्ली पुलिस से भी संपर्क कर रहे हैं। ताकि किसी तरह की आशंका को समाप्त किया जा सके।
