
चंडीगढ़
बैठक में नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन के संबंधों को लेकर भी की चर्चा
जाखड़ को अनुशासन बनाए रखने को कहा, जुबानी जंग से बचने की दी सलाह
पंजाब कांग्रेस के प्रभारी बनने के बाद पहली बार चंडीगढ़ पहुंचे कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सोमवार को कांग्रेस विधायकों से रूबरू हुए। विधायकों और कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान उन्होंने पंजाब कांग्रेस की नब्ज टटोली। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर भी इस दौरान उपस्थित रहे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को उन्होंने अनुशासन बनाए रखने और जुबानी जंग से बचने की सलाह भी दी।
चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस भवन में कांग्रेस के सभी विधायकों को लेकर बैठक का आयोजन किया गया था। संगठन और सरकार के बीच समन्वय को लेकर विधायकों की यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में हरीश अभिभावक की भूमिका में दिखाई दिए। उन्होंने अपना परिचय देते हुए कहा कि जब मैं उत्तराखंड का मुख्यमंत्री था, तब आपदा के दौरान पवित्र धर्मस्थल श्री हेमकुंड साहिब के लिए काफी काम करवाया था। बंद रास्ते खुलवाने के बाद पंजाब के लोगों को बुलाने चंडीगढ़ भी आया था।
परिचय के बाद प्रांत प्रभारी हरीश रावत ने कहा कि इससे पहले भी पंजाब ने देश को रास्ता दिखाया है, इस बार भी रास्ता दिखाएगा। इसलिए राज्य सरकार और संगठन की जिम्मेदारी बेहद बढ़ जाती है। जिसको हमें समझना होगा। संगठन के नेताओं को बेवजह की बयानबाजी से बचकर साथ काम करना होगा। उन्होंने विधायकों से आह्वान किया कि वह किसानों के इस आंदोलन को जमीनी स्तर पर जाकर और मजबूत बनाएं, जिससे यह आंदोलन पूरे देश के किसानों का आंदोलन बन सके।
सिद्धू को लेकर भी हुई चर्चा
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी उपस्थित रहे। पार्टी सूत्रों के अनुसार इस दौरान नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर भी हरीश ने मुख्यमंत्री से कुछ चर्चा की। जानकारी मिली कि मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद अब हरीश जल्द ही नवजोत सिंह सिद्धू से भी मुलाकात कर सकते हैं।
देर रात तक चला बैठकों का दौर
पंजाब भवन में ठहरे कांग्रेस प्रभारी देर रात तक कांग्रेस पदाधिकारियों, सांसदों और विधायकों के साथ मीटिंग करते रहे। उन्होंने इस दौरान सभी को एकजुट होकर पंजाब में किसान आंदोलन और 2022 की तैयारी में जुटने को कहा।
