जुवेनाइल जस्टिस पर हिमाचल सरकार से जवाब तलब

शिमला। प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रधान सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को आदेश दिए हैं कि उन्होंने बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए भारतीय संविधान और जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम के तहत क्या कदम उठाए हैं? ये आदेश न्यायालय ने गारडियन न्यायालय धर्मशाला के समक्ष चल रहे मामले को धर्मशाला से बाहर किसी अन्य न्यायालय द्वारा सुने जाने की गुहार लगाने वाली याचिका पर पारित किए।
प्रार्थियों के अुनसार उन्हें सात वर्षीय तेन्जिन की कस्टडी के लिए तिब्तियन चिल्ड्रंस विलेज धर्मशाला की ओर से धमकी मिल रही है, जबकि यह कस्टडी उन्हें कानूनी तौर पर मिली है। आरोपों के अनुसार प्राथियों कर्मा लामा व पावला पिवि विदेशी नागरिकों द्वारा तेन्जिन की कस्टडी तिब्तियन चिल्ड्रंस विलेज धर्मशाला से ली गई है। उपरोक्त दोनों प्रार्थी इस बच्चे को अपने साथ रख रहे हैं लेकिन तिब्तियन चिल्ड्रंस विलेज द्वारा गारडियन जज धर्मशाला के समक्ष यह कहकर बच्चे की कस्टडी मांगी कि उन्होंने बच्चे अस्थाई तौर पर बच्चे की कस्टडी सौंपी थी। गारडियन न्यायालय धर्मशाला ने बच्चे को न्यायालय के समक्ष पेश करने के आदेश दिए थे जिस पर हाईकोर्ट ने अपनी रोक लगा रखी है।
इसके अलावा कोर्ट के समक्ष यह खुलासा भी किया गया है कि तिब्तियन चिल्ड्रंस विलेजों को विदेशियों द्वारा स्पांसर किया जा रहा है और प्रत्येक बच्चे के खर्च के लिए 480 अमेरिकी डालर इन विलेजों को प्रतिवर्ष के हिसाब से दिया जाता है। न्यायालय ने पाया कि इस धन पर किसी भी सरकारी तंत्र की निगरानी नहीं है। न्यायालय ने इन सभी तथ्यों के दृष्टिगत सरकार को अपनी स्थिति साफ करने के आदेश दिए हैं।

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