
मंडी। जिला मंडी के 1721 प्राइमरी स्कूलों में खजाना खाली है। बिजली के बिल जमा करवाने के लिए सरकारी स्कूलों के पास धन नहीं है। ऐसे में शिक्षकों को बिलों का भुगतान करने के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से मामला शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के ध्यान में लाया गया, लेकिन अभी तक बजट उपलब्ध नहीं हुआ है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों को जारी फंड सरकार ने 31 मार्च 2013 तक वापस ले लिया था। इस कारण स्कूलों के पास एक रुपया तक नहीं है। बजट न होने के कारण जिले भर के 1721 स्कूल सफर कर रहे हैं। हर माह बिजली बिलों की अदायगी व अन्य खर्चोें के लिए शिक्षकों को खासी दिक्कतें हो रही हैं। वर्ष 2012 से जिले के शत प्रतिशत स्कूलों में बिजली की सुविधा उपलब्ध है।
बिजली बोर्ड की ओर से हर माह स्कूलों को बिल भेजे जाते हैं, लेकिन स्कूल में फंड न होने से शिक्षकों को मजबूरन अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। अगर समय पर बिल जमा नहीं होता है तो विभाग कनेक्शन काट सकता है, जिससे स्कूली बच्चों को लाइट से वंचित होेना पड़ेगा।
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान इंद्र सिंह भारद्वाज का कहना है कि इस समस्या को उपनिदेशक व निदेशक के साथ हुई बैठक में उठाया गया है। उन्होंने कहा कि स्कूलों के पास मौजूदा समय में कोई फंड नहीं है, जिससे शिक्षकों को बिजली बिल व अन्य खर्चा वहन करने में दिक्कतें आ रही हैं। एलीमेंटरी शिक्षा के कार्यवाहक उपनिदेशक मोहिंद्र पाल ने माना कि प्राइमरी स्कूलों के पास फंड नहीं है। उन्होंने बताया कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत सभी स्कूलों से फंड वापस लेकर खाता जीरो किया गया था। उन्होंने कहा कि शिक्षा निदेशक के इस मसले पर चरचा की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई जल्द ही स्कूलों को फंड जारी किया जाएगा।
