
नई टिहरी। जिलेभर में 172 पेयजल योजनाएं आपदा की भेंट चढ़ गई है। जिससे 250 से अधिक गांवों में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। ग्रामीणों को दो- ढाई किमी दूर से पानी ढोना पड़ रहा है। जल संस्थान का कहना है, कि इनमें से 85 योजनाओं को अस्थायी रूप से जोड़कर जलापूर्ति कराने के प्रयास किए गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल योजनाएं आपदा से क्षतिग्रस्त हो गई। जिससे गांवों में पांच-छह दिन से पानी का संकट बना हुआ है। आसपास कोई स्रोत और हैंडपंप न होने से ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। कंडीसौड़ ब्लाक मुख्यालय में भी पांच दिन से जल संकट है। वहां पेयजल योजना कोटीगाड के पास दो सौ मीटर तक बह गई। जिससे तीन हजार से अधिक आबादी को बूंद-बूंद पानी को तरसना पड़ रहा है।
कहां- कितनी योजनाएं क्षतिग्रस्त
भिलंगना-35, नरेंद्रनगर- 14, प्रतापनगर- 8, जौनपुर-10, थौलधार-9, कीर्तिनगर-4, जाखणीधार-2 देवप्रयाग-2।
आपदा से जिलेभर में 172 पेयजल योजनाएं पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। जिसमें से 85 योजनाओं पर किसी तरह पानी चलाया गया है। शेष 87 योजनाओं पर भी जलापूर्ति के प्रयास किए जा रहे हैं। 10 दिन से पहले उन पर पानी चलाया जाएगा।-पीएस पंवार, ईई जल संस्थान नई टिहरी।
