जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे वो मंजर

कुमारसैन (शिमला)। क्षेत्र से उत्तराखंड चार धाम यात्रा पर गए करीब 19 लोग वीरवार को सुरक्षित घर लौट आए हैं। मौत से सामना करने के बाद जब ये लोग कुमारसैन पहुंचे तो अपनों को देख आंखों से आंसू छलक पड़े। यहां पहुंचने पर इन लोगों ने कहा कि नौ दिन उनके जीवन के ऐसे दिन थे जिन्हें कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। इस दौरान हमने मौत को नजदीक से देखा। आलम यह था कि हर ओर मौत मंडरा रही थी, लेकिन बचाने वाला कोई नहीं था। उन्होंने कहा कि सेना के लोग समय पर नहीं पहुंचते तो मंजर शायद कुछ और ही होता। आईटीबीपी के जवान और सेना के जवान ही थे जो दिन-रात लोगों को निकालने में लगे थे। कुमारसैन के सोहन महंत, चंद्र वीर, गोपी चंद, कुलदीप श्याम, पंकज श्याम, कमल गुप्ता, लजिया निर्मोही, राजेश वरी, ओक कांता, राधा देवी, आशा देवी, प्रेम लता, ज्योति, मलका देवी, माया गौतम, ब्यासा देवी, निती देवी, विमला देवी और उदय चंद ने बताया कि जब हादसा हुआ तो वे जोशी मठ में फंसे हुए थे। इसके बाद हनुमान चट्टी तक वे पैदल पहुंचे। यहां आईटीबीपी कैंप में ठहरे, जिसके बाद वे हरिद्वार पहुंचे। यहां से वे अपने घर पहुंचे। इन लोगों का कहना है कि इस हादसे के बाद ही जीवन के महत्व का पता चला। इनके घर पहुंचने पर लोगों ने इनका जोरदार स्वागत किया।

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