जानकीचट्टी परियोजना कुप्रबंधन का शिकार

जानकीचट्टी (उत्तरकाशी)। बीफ, खरसाली, जानकीचट्टी तथा यमुनोत्री धाम को रोशन करने के लिए बनी 200 किलोवाट की लघु जलविद्युत परियोजना कुप्रबंधन का शिकार बनकर रह गई है। बीते दो सप्ताह से परियोजना में उत्पादन ठप है। उरेडा ने एक वर्ष के भीतर परियोजना की मरम्मत के नाम पर 15 लाख रुपये खर्च करना तो दिखाया, किंतु बजट कहां खर्च हुआ, अधिकारी यह बताने को तैयार नहीं है। 100 किलोवाट की एक टरबाइन एक साल से ठीक न कर पाने और दूसरी टरबाइन के खस्ताहाल होने से आपदा के दिनों में पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूबा रहा।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की मदद से बनी इस परियोजना के परिचालन और अनुरक्षण की जिम्मेदारी उरेडा ने उपभोक्ता समूह की जानकीचट्टी लघु जलविद्युत समिति को सौंपी हुई है। विभाग स्वयं बड़ी मरम्मत के नाम पर यहां हर साल लाखों खर्च करना दर्शाता है। मगर परियोजना की स्थिति यह है कि वर्षों से फोरवे टैंक और डिसिल्टिंग चैंबर की खराबी के कारण फीडर पाइपों से रेत, पत्थर, लकड़ी सीधे टरबाइनों तक पहुंचकर मशीनों को नुकसान पहुंचा रही है। ऐसे में 100 किलोवाट की दो नंबर टरबाइन अब मरम्मत लायक भी नहीं रह गई है। दो सप्ताह पूर्व एक नंबर टरबाइन के वियरिंग पैड फुंकने से उत्पादन ठप पड़ा है। उरेडा स्थानीय समिति मरम्मत के नाम पर किए जा रहे खर्च बताने को तैयार नहीं। ग्रिड की लाइन भी तीन माह से खराब पड़ी है।
उरेडा की जिला परियोजना अधिकारी वंदना का कहना है कि देहरादून की वाईटेक कंपनी से सालाना मरम्मत का अनुबंध 15 लाख में किया गया था। जो जून में पूरा हो गया है। कितना काम हुआ है, जेई को मौके पर भेजकर पता लगाया जाएगा।

एक साल से क्षतिग्रस्त टरबाइन की मरम्मत नहीं की गई। नुकसान के लिए उरेडा के राज्य परियोजना अधिकारी जिम्मेदार हैं। समिति परियोजना से उत्पादित बिजली की आय कर्मचारियों के वेतन और अनुरक्षण पर खर्च करती है।
केदार सिंह रावत, पूर्व विधायक एवं अध्यक्ष परियोजना समिति

एक साल से खराब पड़ी दो नंबर टरबाइन को बदलने के लिए आपदा से बजट स्वीकृत हो गया है। मशीनों पर सालाना कितना खर्च हुआ, अभी कोई जानकारी नहीं है।
एसके त्यागी, राज्य परियोजना अधिकारी उरेडा

ग्रिड की लाइन जानकीचट्टी तक पहुंचा दी गई है। अगस्त 2012 की आपदा में हनुमान चट्टी सब स्टेशन बहने और इस समय बाडिया और सिलाईबैंड में लाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण ग्रिड से विद्युत आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

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