
जागरूकता का अभाव बन रहा जानलेवा
बद्दी (सोलन)। जागरूकता के अभाव में अभी भी ग्रामीण लोग सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले रहे हैं। जिसका उदाहरण बरोटीवाला पंचायत की कोटला गांव में देखने को मिला। गरीब परिवार से संबंध रखने वाली महिला ने घर पर ही प्रसव करवाया। प्रसव के एक घंटे के बाद ही महिला ने दम तोड़ दिया।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत जननी सुरक्षा योजना तथा जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम देश भर में चलाए हैं। प्रदेश में इन योजनाओं की प्रचार व प्रसार का जिम्मा आईईसी विंग को दिया गया। जननी सुरक्षा योजना के तहत गरीब व एससी एसटी परिवार की महिलाओं को चिकित्सालय में प्रसव कराने पर नकद राशि दी जाती है। गांव में सात सौ रुपये व शहर में छह सौ रुपये दी जाती है। इसके अलावा आने जाने की भी मुफ्त सुविधा दी जाती है। वहीं जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत सभी महिलाओं को प्रसव के दौरान मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा दी जाती है। अगर ऑपरेशन की जरूरत पड़े तो भी यह सुविधा मुहैया कराई जाती है। सामान्य अवस्था में तीन दिन तक चिकित्सालय में मुफ्त डाइट का भी प्रावधान है। खून की जरूरत पड़े तो मुफ्त खून की भी व्यवस्था चिकित्सालय की ओर से की जाती है।
इतना सब कुछ होने के बावजूद भी जागरूकता के अभाव में लोग अभी भी घर में प्रसव करा रहे हैं। बरोटीवाला में भजन सिंह गरीब परिवार के संबंध रखता है। उसका एक बेटा पीजीआई में बीमार है। तीन बेटियों के बाद यह चौथा बच्चा था तो पैदा होते ही मर गया। प्रसव के बाद महिला ठीक थी लेकिन अचानक तबियत खराब होने से महिला के हाथ पांव ठंडे हो गए जब तक महिला को चिकित्सालय पहुंचाया तब तक वह अपने प्राण त्याग चुकी थी।
इस संबंध में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. उदित ने बताया कि प्रचार और प्रसार के आईईसी विंग को तैनात किया है। जो गांव-गांव जाकर सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी देते हैं। इसके अलावा रेडियो, टीवी पर भी योजनाओं का प्रचार किया जाता है। 108 योजना मुफ्त रोगियों को चिकित्सालय तक पहुंचाती है। उसके बावजूद भी अगर लोग घर में प्रसव करवा रहे हैं तो यह उनकी कमी ही हो सकती है।
