
उत्तरकाशी। सुपार्गा तथा मल्ला के बीच मोटा जलस्रोत फूटने से गांव की धान की खड़ी फसल सहित 100 नाली खेत धंस कर बर्बाद हो गए तथा करीब 200 नाली धान के खेत धंसने शुरू हो गये। भूधंसाव की चपेट में आने से तीन मकान की दीवारें फटने लगी है।
गांव की अनुसूचित जाति की बस्ती के दो मकान ध्वस्त होने के साथ ही बस्ती के 15 परिवार के घरों पर धंसाव का खतरा मंडराने से वे दिन में अपने घर तथा रात गोशालाओं में बिता रहे हैं। गांव के नीचे गंगोत्री हाईवे भी इस भूधंसाव की चपेट में आने से पैदल आवाजाही लायक भी नहीं बचा है। भारी बारिश तथा जलस्रोत फूटने से गंगोत्री हाईवे पर 295 परिवार वाले मल्ला गांव के सभी मकानों में दरारें पड़ी है। सुपार्गा में केदार लाल, भगेंद्री देवी तथा हिकमत लाल की दीवारें फटने से उन्होंने घर खाली कर दिया। बस्ती के नीचे पानी का स्रोत फूटने से 40 परिवारों के घरों पर तबाही का खतरा मडराने लगा। मल्ला के नीचे अनुसूचित जाति की बस्ती में महिपाल व हर्षलाल के मकान ध्वस्त हो गये है तथा रामचंद्र, हिकमत, एतवर लाल आदि 15 लोगों के घरों में पीछे से धंसाव होने से खतरे की जद में आ गये हैं।
क्षेत्र पंचायत सदस्य बलवंत तथा मल्ला गांव के महावीर सिंह बताते है कि इस बार की अप्रत्याशित बारिश से गांव में चारों ओर पानी ही पानी निकल रहा है। दो माह से अनुसूचित जाति की बस्ती के लोग अपने घरों के बजाय गोशालाओं में रात गुजार रहे हैं। गांव की धान की खेती वाली जमीन भूधंसाव की चपेट में है।
मल्ला गांव से होकर गुजर रहे गंगोत्री हाईवे की स्थिति इस कदर खराब है कि दिन को आवजाही के लिये जो पैदल मार्ग तैयार करते है वह रात को धंस कर बराबर हो जाता है। अब इस भूस्खलन क्षेत्र के सीधे भागीरथी में मिलने व ऊपर से जल स्रोत फूटने से हो रहे धंसाव तथा नीचे से नदी के कटाव की दोहरी मार से इस पर लंबे समय तक यातायात शुरू होना मुश्किल हो गया है। बीआरओ इस भूस्खलन क्षेत्र से पार पाने में असहज वाली स्थिति में लगता है।
