
अल्मोड़ा। आपदा से क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों के पुनर्निर्माण के लिए सरकार ने भारी भरकम बजट उपलब्ध कराने का दावा तो किया था, लेकिन छह माह बाद भी जल संस्थान की 56 योजनाएं दुरुस्त नहीं हो सकी हैं। हालांकि विभाग ने इन योजनाओं को कामचलाऊ बना रखा है। कामचलाऊ योजनाओं में खराबी आने से पानी आपूर्ति प्रभावित होती रहती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। लोगों में विभाग और शासन के खिलाफ आक्रोश है।
जल संस्थान अल्मोड़ा डिवीजन पर शहर के अलावा लमगड़ा, धौलादेवी, हवालबाग, भैंसियाछाना, ताकुला ब्लाक में पानी की आपूर्ति की जिम्मेदारी है। जून की आपदा से पेयजल योजनाओं को भी काफी नुकसान पहुंचा था। आपदा से जल संस्थान अल्मोड़ा डिवीजन की 79 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इससे कई ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहरा गया था। विभाग ने अपने संसाधनों से कुछ समय बाद इन योजनाओं को काम चलाऊ तो बना दिया। पर बजट नहीं मिलने से स्थायी सुधारीकरण नहीं हो सका है और इन योजनाओं से पानी की आपूर्ति आए दिन बाधित होती रहती है। जिससे संबंधित क्षेत्र के लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ता है।
विभाग के अधिशासी अभियंता जेएस मेहता ने बताया कि 79 क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं के लिए 103.81 लाख का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। आपदा मद से विभाग को 38 योजनाओं की मरम्मत के लिए 50.64 लाख रुपये मिले हैं। इनमें से क्षतिग्रस्त हुई 23 योजनाओं का विभाग ने सुधारीकरण कार्य पूरा कर लिया है, जबकि 15 योजनाओं की मरम्मत का कार्य प्रगति पर है। यह कार्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। जबकि शेष 41 क्षतिग्रस्त योजनाओं के लिए बजट अवमुक्त होने के बाद काम शुरू हो सकेगा।
