जल प्रलय में लापता मिले घर पर

चंद्रनगर रेलवे कॉलोनी मुरादाबाद (यूपी) हाल निवासी श्रीकोट श्रीनगर मदनमोहन पंत की ओर से अपनी पत्नी और पुत्री की केदारनाथ जल प्रलय में आने की बात कहकर गुमशुदगी दर्ज कराई गई। विवेचना के दौरान पता चला कि पंत ने कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। उनका कोई पुत्र नहीं है। उनकी पत्नी और पुत्री सकुशल घर पर हैं।

केस-2
गुप्तागंज बाजार जिला पलवल (हरियाणा) के देवेंद्र चौहान ने एक युवती के केदारनाथ आपदा में लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। जांच दल के मौके पर पहुंचने पर पता चला कि संबंधित युवती का परिवार केदारनाथ यात्रा में नहीं गया था। वह रिपोर्ट दर्ज कराने वाले देवेंद्र को भी नहीं जानते हैं।

केस-3
शिवशंकर कॉलोनी औरंगाबाद (महाराष्ट्र) निवासी रोहित मुरलीधर ने कुसुम और विश्वनाथ गायकवाड़ की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। तहकीकात में मालूम हुआ कि विश्वनाथ की मौत फरवरी 2006 में हो चुकी है, जबकि कुसुम अपने घर में सकुशल हैं। गुमशुदगी की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने पर पुलिस ने रोहित के विरुद्ध आईपीसी की धारा 182 में रिपोर्ट दर्ज की है।

केस-4
पाथरिया (मध्य प्रदेश) निवासी शंकर की ओर से गुलाब बाई, उत्तम चंद्र और ईश्वर चंद्र के केदारघाटी आपदा के दौरान लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच में खुलासा हुआ कि उत्तम की छह वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है। गुलाब बाई और ईश्वर अपने घर पर हैं। वे इस वर्ष केदारनाथ यात्रा पर नहीं आए। बताया गया कि गुमशुदगी लिखाने वाला स्वयं वर्षों से लापता चल रहा है।

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ जल प्रलय में लापता लोगों की विवेचना में नए रहस्य खुल रहे हैं। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कुछ लोगों ने दूसरों के नाम से गुमशुदगी दर्ज करा दी। जो लोग गुमशुदा बताए जा रहे थे, वह अपने घर पर सकुशल मिले। उनको अपनी गुमशुदगी की बात तब पता चली, जब पुलिस विवेचना के लिए उनके घर पहुंची।
16/17 जून के जलप्रलय में लापता लोगों की पुलिस टीमें विवेचना कर रही हैं, ताकि यह मालूम हो सके कि जिन लोगों की गुमशुदगी केदारनाथ जलप्रलय में दर्ज कराई गई है, वह वास्तव में यात्रा में आए थे कि नहीं। विवेचना के दौरान विवेचक(सब इंस्पेक्टर) जब कुछ घरों में पहुंचे, तो संबंधित परिवार और विवेचक भी हैरत में पड़ गए। उन्हें विवेचकों से ही पता चला कि उनके परिजनों की गुमशुदगी दर्ज है। जबकि उनका परिवार केदारनाथ यात्रा पर गया ही नहीं । वह घर पर ही हैं। मदन मोहन पंत के साथ तो ऐसा हुआ कि किसी ने उनके नाम से ही गुमशुदगी दर्ज करा दी। वहीं कुछ मामलों में जब पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कराने वाले की तलाश की, तो वह मिला ही नहीं। एक मामले में तो पता चला कि गुमशुदगी कराने वाला ही कई वर्षों से लापता है।

कोट——————
ऐसे मामले आए हैं, जिनमें दूसरों के नाम से रिपोर्ट दर्ज कराई गई है या फिर गुमशुदगी लिखाने वाले का नाम पता गलत है। ऐसे मामलों में गुमशुदगी खारिज की जा रही है। बीजे सिंह, एसपी रुद्रप्रयाग

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