
भल्याणी (कुल्लू)। बंजार घाटी के अति दुर्गम दारन के प्राथमिक स्कूल में बच्चों का भविष्य जलवाहक के हाथ में है। स्कूल में तैनात एक मात्र शिक्षक का दो साल पहले तबादला हो गया था। तब से लेकर यह स्कूल एक जलवाहक के सहारे चल रहा है। विभाग की ओर से प्रतिनियुक्ति पर एक शिक्षा भेजा है लेकिन वह मात्र सप्ताह में एक दिन यहां आता है। इसके अलावा अन्य दिन वह अपने स्कूल में सेवाएं देता है। इस कारण स्कूल में अब बच्चों की संख्या नाममात्र रह गई है।
दो साल पहले प्राथमिक स्कूल दारन में करीब ढाई दर्जन बच्चे बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे थे लेकिन अब स्कूल में केवल तीन बच्चे ही रह गए हैं। स्कूल में लगातार घट रही बच्चों की संख्या पर क्षेत्र के लोगों ने भी चिंता जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल में स्थाई शिक्षक न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। इस कारण उन्हें अपने बच्चों को दूसरे स्कूल में पढ़ाना पड़ रहा है।
लोगों ने विभाग से स्कूल में शीघ्र शिक्षक तैनात करने की मांग की है। पंचायत नुहानड़ा के प्रधान स्वर्ण सिंह और पूर्व प्रधान अनु का कहना है कि दो साल पहले दारन स्कूल से शिक्षक का तबादला कहीं और कर दिया गया। तब से लेकर कई शिक्षकों का तबादला यहां हुआ लेकिन उन्होंने अपनी एडजेस्टमेंट दूसरी जगह करवा ली। दो साल से स्कूल को स्थायी शिक्षक नहीं मिला। स्कूल एक जलवाहक के सहारे चल रहा है। विभाग की ओर से प्रतिनियुक्ति पर यहां सप्ताह में एक दिन के लिए शिक्षक भेजा जाता है। इस कारण स्कूल में अब केवल तीन बच्चे रह गए हैं। बीईओ एलीमेंटरी बंजार ज्ञान चंद ने कहा कि दारन स्कूल की स्थिति के बारे में विभाग और सरकार को अवगत करवाया दिया गया है। शीघ्र ही स्कूल में स्थाई शिक्षक की तैनाती की जाएगी।
