जरा इनकी भी सुध लीजिए सरकार

गोपेश्वर। पोखरी विकास खंड का हापला घाटी में अभी भी विकास से कोसों दूर है। यहां ग्रामीण आज भी सड़क तक आने के लिए करीब पांच किमी पैदल सफर तय करते हैं।
हापला-धोतीधार मोटर मार्ग का निर्माण कार्य 22 किमी तक होना है। इसका फायदा नेल, नौली, सिदेली, कुदड़ी, कुलेंडू, गुडम, थलगढ़ और गोदली गांवों को मिलेगा। सड़क बनने से हापला घाटी के करीब 15 हजार की आबादी ऊखीमठ, दशोली, पोखरी और अगस्त्यमुनि से जुड़ जाएगी, लेकिन लोनिवि के अधिकारियों की उदासीनता के चलते पिछले कई सालों से सड़क का निर्माण कार्य चार किमी कलसीर तक ही सिमटा हुआ है। निर्माणाधीन सड़क भी वाहनों के चलने लायक नहीं है। हापला घाटी में शिक्षा व्यवस्था भी बदहाल है। क्षेत्र के जीआईसी गोदली में क्षेत्रभर के छात्र-छात्राएं पढ़ने जाते हैं, लेकिन यहां पिछले कई सालों से प्रधानाचार्य और शिक्षकों के पद रिक्त चल रहे हैं।

केस-1
वर्ष 2010 में नौली गांव के 40 वर्षीय प्रेम सिंह को दिमागी बुखार ने जकड़ लिया था। क्षेत्र में कोई अस्पताल नहीं होने पर परिजनों ने कई घरेलू उपाय किए, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। हालत अधिक बिगड़ने पर ग्रामीण प्रेम सिंह को चारपाई से 18 किमी दूर सीएचसी पोखरी लाए। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल गोपेश्वर भर्ती किया गया, लेकिन यहां भी उसकी हालत नहीं सुधरने पर उसे हायर सेंटर देहरादून रेफर किया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।

केस-2
हापला निवासी 42 वर्षीय बलवंत सिंह के साथ भी यही हुआ। बलवंत वायरल फीवर की चपेट में आया, लेकिन उसे समय पर सही उपचार नहीं मिल पाया। कुछ दिनों घर पर ही जानकारी के अनुसार दवाईयां दी गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। बाद में बलवंत को जिला अस्पताल लाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।

केंद्र-राज्य सरकारों का गांवों को सड़क से जोड़ने का नारा सिर्फ कागजों तक सीमित है। हालपा घाटी के ग्रामीण आज भी खानाबदोश जिंदगी जी रहे हैं। हमें स्वास्थ्य और सड़क सुविधा के लिए आज भी मीलों दूरी तय करनी पड़ रही है।
-नारायण सिंह नेगी, हापला घाटी संघर्ष समिति अध्यक्ष।

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