
बिलासपुर। आजाद भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के उपलक्ष्य में सोमवार को शहर के डियारा सेक्टर में आंगनबाड़ी केंद्र व नर्सरी स्कूल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला शिकायत निवारण समिति के सदस्य हुसैन अली के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जहां मौलाना आजाद को याद किया गया। वहीं आंगनबाड़ी व नर्सरी के नौनिहालाें को नोटबुक्स, पेंसिलें व मिठाई भी बांटी गई।
कार्यक्रम के दौरान हुसैन अली ने मौलाना आजाद के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्हाेंने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद एक महान विद्वान थे। उन्हें न केवल प्राचीन गौरव ग्रंथों के बारे में पूरा ज्ञान था, बल्कि आधुनिक विज्ञान को समझने की प्रतिभा भी थी। महज 16 से 18 वर्ष की आयु के बीच उन्हाेंने तीन प्रतिष्ठित पत्रों का संपादन किया था। उन्होंने धर्मांधता, ढोंग व सांप्रदायिकता का हमेशा विरोध करते हुए सर्व धर्म व समुदायों की एकता की पैरवी की। वर्ष 1920 में महात्मा गांधी के साथ मुलाकात के बाद से वह उनके साथ रहे। असहयोग आंदोलन में भाग लेने पर वह दो वर्ष जेल में भी रहे।
हुसैन अली ने कहा कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी मौलाना आजाद ने शिक्षा मंत्री रहते हुए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद का पुनर्गठन करने के साथ ही माध्यमिक शिक्षा आयोग, विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग व खड़गपुर उच्च प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना भी की। संगीत, साहित्य व कला की तीन अकादमियों की स्थापना में भी उनका अहम योगदान रहा। उन्हाेंने बच्चों को मौलाना आजाद के जीवन से प्रेरणा लेने व उनके पदचिन्हाें पर चलने की सलाह दी। इस मौके पर समाजसेवी मनीष शर्मा, प्रताप सिंह भल्ला, अब्दुल मजीद व राजपाल भी उनके साथ थे।
