
घुमारवीं (बिलासपुर)(प्रकाश)उपमंडल घुमारवीं के 62 गांवों में जमीन खरीदने और बेचने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग गया है। सौंदर्यकरण के नाम पर 11 पंचायतों को नगर योजना अधिनियम के दायरे में लाया जा रहा है। राज्य सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी करते हुए राजस्व विभाग को संबंधित पंचायतों की रजिस्ट्री नहीं करने के आदेश दिए हैं। घुमारवीं नगर परिषद की निकटवर्ती 11 पंचायतों के लगभग 62 गांवों की 4556.99 हेक्टेयर भूमि इसके दायरे में आएगी। चार मार्च को जारी अधिसूचना के माध्यम से नगर नियोजन अधिनियम के तहत घुमारवीं योजना क्षेत्र के रूप में गठित किया गया। दस मार्च को अधिसूचना प्रकाशन से लागू हुई। अधिसूचना के अनुसार इन क्षेत्रों में आगामी तीन साल तक भूमि का वर्तमान उपयोग बदलने पर भी प्रतिबंध लग गया है। हालांकि घुमारवीं योजना क्षेत्र के गठन का उद्देश्य इस क्षेत्र में हो रहे अंधाधुंध बेतरतीब निर्माण को नियंत्रित कर नियोजित निर्माण का बढ़ावा देना है। तहसीलदार घुमारवीं कुलदीप ने कहा कि अधिसूचना के अनुसार घुमारवीं की 11 पंचायतों की रजिस्ट्री पर रोक लगी है। इस इलाके के लोग न तो भूमि बेच सकेंगे और न ही खरीद सकेंगे। भूमि का वर्तमान स्वरूप भी नहीं बदला जा सकेगा।
33 हजार की आबादी प्रभावित
अधिसूचना लागू होने से घुमारवीं नगर परिषद एवं इसकी समीपवर्ती ग्राम पंचायत घुमारवीं, कोठी, दावला, पडयालग, लुहारवीं, पट्टा, डंगार, सेऊ, बकरोआ, दधोल और तड़ौन के 62 गांव दायरे में आएंगे। इन गांवों की लगभग 33177 की आबादी प्रभावित होगी। नए निर्माण को भी विशेष अनुमति लेनी पडे़गी।
विरोध के स्वर भी गूंजे
अधिसूचना को लेकर विरोध के स्वर भी मुखर होने लगे हैं। भाजपा विधि प्रकोष्ठ के सह संयोजक रविंद्र सिंह ठाकुर, प्रेम सागर भारद्वाज, विनोद गुलेरिया, कुलदीप लखनपाल, अनिल ठाकुर और पवन शर्मा ने कहा कि इस निर्णय से इन क्षेत्रों के लोग विभाग की अनुमति के बगैर भूमि का विक्रय, उपहार, तबादला या रहन आदि नहीं कर सकेंगे। नप से सटे धार्मिक स्थलों के विकास के लिए तो कोई कदम नहीं उठाए। अब इन क्षेत्रों के सौंदर्यकरण के नाम पर कई बंदिशें लगा ली हैं। इसके विरोध में आंदोलन शुरू किया जाएगा।
