जघन्य अपराध में सजा दर 15 फीसदी : डीसी

बिलासपुर। उपायुक्त बिलासपुर डा. अजय शर्मा की अध्यक्षता में निरंतर चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) के तहत एक दिवसीय डीएनए प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में पुलिस अधीक्षक कपिल शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एम एल कौशल, डा. सांख्यान, खंड चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी और पुलिस अधिकारियों समेत कुल 42 अधिकारियों ने भाग लिया।
उपायुक्त डा. अजय शर्मा ने बताया कि पुलिस, डॉक्टर और वकीलों के कौशल से सही अपराधी को ढूंढने और सजा दिलाने में सफलता मिलती है। गवाही और साक्ष्यों के अभाव में हत्या, बलात्कार और चोरी जैसे जघन्य अपराध करने वाले कानून से बच जाते हैं। जिला में जघन्य अपराध के मामले में सजा दिलाने की दर 15 प्रतिशत है, ऐसे मामलों में गवाह गवाही देने से पीछे हट जाता है। इससे केस कमजोर पड़ जाता है, वैज्ञानिक सबूत ही सजा का आधार होते हैं। अगर डॉक्टर, वकील और पुलिस साथ मिलकर अपने-अपने दायित्वों को कुशलतापूर्वक निभाएं तो असली दोषी को सजा दिलाकर, अपराध की दर कम की जा सकती है। जनता में न्याय स्थापित कर सरकार के प्रति विश्वास बरकरार रखा जा सकता है। फोरेंसिक विशेषज्ञ डा. कपिल शर्मा ने बताया कि घटनास्थल और घटना के समय की सही जानकारी, शव परीक्षा में शरीर पर लाल, नीले, हरे और पीले रंगों का सही लिखना, चोट, डंडे से प्रहार, तीखे हथियार से प्रहार का रिपोर्ट में सही अंकित करना सही निर्णय तक पहुंचाने में सहायक हैं। मृत्यु जहर निगलने, डूबने, सांप के काटने से या आत्महत्या की है। इस संबंध में डीएनए एक वैज्ञानिक आधार है।

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