जखोली और भरारीसैण में खुलेंगे कृषि महाविद्यालय

नई टिहरी। पर्वतीय क्षेत्र के काश्तकारों की आर्थिकी को बढ़ावा देने के लिए औद्यानिकी एवं वानिकी विवि भरसार रानीचौरी ग्रास रूट तक शोध और प्रसार केंद्रों का विस्तार करने जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की योजना भी है।
कृषि विवि रानीचौरी रुद्रप्रयाग जिले के जखोली चिरबटिया में पर्वतीय कृषि महाविद्यालय, गैरसैंण के भरारीसैण में औषधीय सगंध पौध शोध एवं शिक्षण संस्थान इसी सत्र से खोल रहा है। दोनों केंद्रों के लिए विवि ने 30-30 सीटें निर्धारित की हैं। चयनित अभ्यर्थियों को विवि नि:शुल्क सर्टिफिकेट कोर्स इन हार्टिकल्चर में प्रवेश देगा। औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार रानीचौरी के प्रति कुलपति डा. पीएस बिष्ट ने बताया कि विवि में होने वाले शोध का लाभ किसानों को मिले इसके लिए विवि ने कार्य योजनाएं तैयार की है। अधिकाधिक लोग कैसे खेती से जुडे़ं और काश्तकारों की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के लिए शोध केंद्रों का विस्तार किया जा रहा है। वह शोध केंद्रों में जाकर यह सीख सकें कि उन्हें किस तरह से पैदावार करनी है। चिरबटिया में महाविद्यालय खुलने से काश्तकार अपनी समस्याओं के संबंध में भी जानकारी ले सकते हैं। गैरसैंण में लोगाें का यह बताते का प्रयास किया जाएगा कि जड़ी-बूटियों और फूलों की खेती कैसे करनी है।

प्रवेश के लिए 21 अंतिम तिथि
सर्टिफिकेट कोर्स इन हार्टिकल्चर में प्रवेश के लिए 21 अक्तूबर की तिथि निर्धारित की गई है। आपदाग्रस्त क्षेत्र के चयनित अभ्यर्थियों को प्रवेश में वरीयता दी जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों को 500 रुपये प्रति माह छात्रवृत्ति दी जाएगी। प्रति कुलपति डा. बिष्ट ने बताया कि 10वीं उत्तीर्ण अभ्यर्थी सर्टिफिकेट कोर्स इन हार्टिकल्चर में प्रवेश ले सकते हैं।

Related posts