
नई दिल्ली: अंडरवल्र्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के वकील रहे श्याम केसवानी ने दावा किया है कि जिन शर्तों पर आज छोटा राजन को इंडोनेशिया से भारत लाया गया, उसी तरह दाऊद भी भारत आना चाहता था। लेकिन तब सरकार नहीं मानी। बता दें कि छोटा राजन को इंडोनेशिया में गिरफ्तार करने के बाद शुक्रवार को भारत लाया गया। उसे फर्जी पासपोर्ट मामले में 5 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा गया है।
केसवानी ने कहा कि दाऊद और छोटा शकील दोनों सरेंडर करना चाहते थे। वे नहीं चाहते थे कि उन्हें मुंबई की ऑर्थर रोड जेल में रखा जाए। केसवानी के मुताबिक, दाऊद चाहता था कि उसे जेल के बदले हाउस करके अरेस्ट रखा जाए। दाऊद ने खुद की जान को खतरा बताया था। इसलिए वह जेल में नहीं रहना चाहता था। बता दें कि जेठमलानी भी कुछ वक्त पहले दावा किया था कि दाऊद इब्राहिम सरेंडर करना चाहता था लेकिन महाराष्ट्र के तत्कालीन सीएम शरद पवार ने उसकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया था। केसवानी ने राम जेठमलानी के बयान का भी जिक्र किया।
इससे पहले जेठमलानी ने कहा था कि सरकार से दाऊद इस बात की भी गारंटी चाहता था कि पुलिस थर्ड डिग्री का इस्तेमाल नहीं करेगी। उसने मुंबई के 1993 बम धमाके में खुद को बेकसूर बताया था। जेठमलानी ने यह भी कहा था कि सिर्फ महाराष्ट्र सरकार ही नहीं, केंद्र में तब सत्ता में रही यूपीए सरकार ने भी दाऊद की शर्तें मानने से मना कर दिया था।
बताया जाता है कि जेठमलानी और दाऊद के बीच ये बातचीत लंदन में हुई थी। छोटा शकील ने भी इस बातचीत की पुष्टि की थी। एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में छोटा शकील ने दावा किया था कि बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने दाऊद को सरेंडर नहीं करने दिया।
