छोंछ के उफान ने डराया

नूरपुर (कांगड़ा)। छोंछ खड्ड दो दिन से जबरदस्त उफान पर है। इसके चलते आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बनने लगा है। गांवों की सुरक्षा के लिए बनाई गई मिट्टी की धुस्सी तथा क्रेट तीन जगह से टूट गए हैं। छोंछ खड्ड में आने वाली बाढ़ का पानी सीधे तौर पर कंदरोड़ी में सेना के नौ एफडी कैंप को हिट कर सकता है। सेना के इस कैंप में आयुद्ध भंडार है।
छोंछ में आने वाली बाढ़ का खतरा मलोट, तोकी, बांई अटारियां तथा कंदरोड़ी गांव को सबसे ज्यादा है। बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने के भय से ज्यादातर लोग खुले में घरों की छतों पर रातें बिता रहे हैं। खड्ड किनारे सालों से रह रहे दर्जनों गुज्जर परिवारों पर भी खतरा मंडराने शुरू हो गया है। पिछले कई सालों से इस खड्ड में आने वाली बाढ़ के कारण सैकड़ों कनाल भूमि बह चुकी है। सेना ने अपने कैंप को बचाने के लिए कई बार खड्ड के दाईं ओर मिट्टी से धुस्सी भी बनाई है। लेकिन आज तक इन गांवों व सेना के कैंप को बचाने के लिए कोई ठोस काम नहीं हुआ है। नूरपुर उपमंडल के सुखार से पंजाब के मीरथल तक 34 किलोमीटर लंबी इस खड्ड के किनारे 25 गांव बसे हुए हैं। इस खड्ड के तटीकरण के लिए 237 करोड़ की डीपीआर केंद्रीय भू-जल विभाग दिल्ली में स्वीकृति के लिए विचाराधीन है।

मिट्टी की धुस्सी बही : अभियंता
सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता पीके शर्मा के अनुसार दिल्ली से डीपीआर की स्वीकृति के बाद छोंछ खड्ड के तटीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा। विभाग के अनुसार 34 किलोमीटर लंबी छोंछ खड्ड मीरथल के पास ब्यास नदी में मिलती है। फिलहाल विभाग ने मिट्टी की धुस्सी से पानी का बहाव मोड़ने की कोशिश की थी। लेकिन यह कारगर साबित नहीं हुआ।

पुल पर भी मंडराया खतरा
इसके अलावा खड्ड पर बने अटाहड़ा, डाह तथा बांई पुल पर भी खतरा मंडराया हुआ है। बांई पुल के कुछ पिलर पहले ही चरमरा चुके हैं, जिसकी मरम्मत की जा रही है। बांई पुल पर मरम्मत के चलते वाहनों का आवागमन भी बंद किया गया है।

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