
खरादी(उत्तरकाशी)। यमुनोत्री हाईवे पर खरादी फॉल के आसपास विकसित नए ग्रामीण पर्यटक स्थल को इस वर्ष यमुना की लहरों ने लील लिया। लोग इस तबाही के लिए पास में बन रहे आठ मेगावाट के पावर प्रोजेक्ट को जिम्मेदार मान रहे हैं।
बड़कोट-यमुनोत्री हाईवे पर खनेड़ा, भंसाड़ी, नगाणगांव, स्यालना व पालर के लोगों ने इस खूबसूरत जगह को विकसित कर यहां अपने घर, होटल, ढाबे और दुकानें बनाई। बाढ़ से पिछले वर्ष अब तक यहां 69 लोगों की आजीविका के साधन खत्म हो गए। क्षेत्र के बुजुर्ग राजेंद्र सिंह, केंद्र सिंह तथा खनेड़ा के पूर्व प्रधान राजेंद्र चौहान का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी यमुना को तटवर्ती हिस्सों को तहस-नहस करते नहीं देखा। प्रभावितों ने प्राइवेट हाइड्रो पावर कंपनी को पास में ही यमुना में बांध बनाकर पावर चैनल से पानी ले जाने के लिए किए गए बेतरतीब निर्माण की प्रशासन से शिकायत की थी। एसडीएम ने शिकायत सही पाकर प्रोजेक्ट का काम रुकवा कर नोटिस थमाया भी था। बाद में फिर काम शुरू हो गया। सीएम ने भी गत वर्ष यहां बाढ़ सुरक्षा कार्य शुरू करवा कर खरादी कस्बे को बचाने का भरोसा दिलाया था। सिंचाई विभाग ने इसके लिए 6.52 करोड़ का इस्टीमेट भी तैयार कर शासन को भेजा था। लेकिन अब तक एक धेला नहीं मिला। अब नतीजा सामने है।
पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि यमुना जैसी शांत नदी से इस तरह के बर्ताव की उम्मीद नहीं थी। यह बहाव में छेड़छाड़ का नतीजा है।
नाकाम रहा सरकार का आपदा प्रबंधन
नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट भी खरादी पहुंचे। उन्होंने भी स्वीकार किया कि खरादी कस्बे की बर्बादी के पीछे हाइड्रो पावर कंपनी द्वारा नदी के बहाव में की गई छेड़छाड़ है। सरकार ने भी पिछले वर्ष की आपदा से सबक न लेकर समय रहते सुरक्षा कार्य नहीं किए। जिन लोगों ने यमुनोत्री में फंसे यात्रियों को निकालने में अपने घर, होटल, दुकानें तोड़कर यातायात बहाल करने में मदद की, उन्हें भी मुआवजा नहीं मिला।
दीर्घकालिक योजना बनाने की जरूरत
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना था कि अब खरादी के साथ ही गंगनाणी, उत्तरकाशी, जोशियाड़ा, तिलोथ, मांडो और गंगोरी को बचाने के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करने का समय है। मजबूत तटबंध निर्माण कर लोगों को भविष्य की आपदा से बचाने की जरूरत है।
