
शिमला। उत्तराखंड में छोटी चार धाम की यात्रा करने गए कुमारसैन क्षेत्र के 25 लोगों ने मौत को करीब से देखा है। कुमारसैन, जार और बेथल गांव के ये लोग नौ जून को उत्तराखंड गए थे। इन्होंने यहां छोटी चार धाम यात्रा से मशहूर गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ तीर्थ स्थलों के दर्शन करने थे। यह जत्था 16 से 18 जून तक केदारनाथ से बद्रीनाथ की ओर लौटते समय लापता हो गया था। इस जत्थे की अब छह महिलाएं अब जोशीमठ से सुरक्षित ऋषिकेश पहुंच चुकी हैं। शेष 19 लोग अभी भी बद्रीनाथ में राहत का इंतजार कर रहे हैं। इस जत्थे में गए अधिकांश लोगों की उम्र 60 साल से अधिक है।
ऋषिकेश सुरक्षित पहुंची लज्जा निर्मोही ने ने फोन पर बताया कि केदारनाथ में प्राकृतिक आपदा बरपने से एक दिन पहले 15 जून को जत्था केदारनाथ में दर्शन कर लौट गया था। 16 जून को चमोली के पास फंस गए। अगले तीन दिन तक किसी से भी संपर्क नहीं हुआ। पहाड़ियां दरकती हुईं और लोगों को मरते हुए उन्होंने अपनी आंखों से देखा। एक बार तो लगा आज सब कुछ खत्म हो जाएगा लेकिन किसी तरह से सभी लोगों ने एक-दूसरे को संभालते हुए भूखे और प्यासे रहकर मदद का इंतजार किया। इस दौरान सभी लोग बद्रीनाथ की ओर पैदल ही निकल लिए। 19 जून को तीन दिन बाद बद्रीनाथ पहुंचे। यहां होटल में जाकर रहे। यहां से जोशीमठ जाने के लिए हजारों की संख्या में लोग फ्लाइट की वेटिंग में थे। 20 जून को डाक्टरों की टीम ने लोगों का मेडिकल परीक्षण किया और बीमार लोगों को पहले लेकर जाने का फैसला लिया। इसके चलते उनके जत्थे में से छह महिलाएं सुरक्षित जोशीमठ और फिर ऋषिकेश पहुंच गई हैं। शेष 19 लोग अभी भी बद्रीनाथ में मदद के इंतजार में हैं।
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एसडीएम शिमला ने निरंतर रखा संपर्क
एसडीएम शिमला शहरी जीसी नेगी की सास लज्जा निर्मोही भी इस जत्थे का हिस्सा हैं। एसडीएम ने बताया कि शिमला से संपर्क साधकर परिजनों को चमोली से बद्रीनाथ और फिर हेलीपैड जाने की सूचना दी। जिसके चलते छह महिलाएं सुरक्षित ऋषिकेश पहुंच चुकी हैं। शेष लोगों को लाने के लिए प्रयास जारी हैं।
एडीसी टू गवर्नर के संपर्क सूत्र आए काम
एसडीएम जीसी नेगी ने बताया कि एडीसी टू गवर्नर संदीप भारद्वाज ने एक बहुत बेहतर संपर्क सूत्र के रूप में काम करते हुए लोगों की जान बचाई है। उन्होंने अपनी जान पहचान के बलबूते प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाई। इसके अलावा देहरादून के आईजी आईटीबीपी आईएस नेगी और जोशीमठ में कमांडेंट त्रिपाठी ने भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
