चोलगढ़ में सप्ताह में दो दिन होता है उपचार

टिहरा (मंडी)। सरकाघाट उपमंडल का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चोलगढ़ सप्ताह में दो दिन ही खुलता है। अन्य दिनों में स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लटका रहता है। दो सालों से स्वास्थ्य केंद्र में एक भी डाक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स, दाई, चपरासी और सफाई कर्मचारी नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संधोल से एक फार्मासिस्ट को डेपुटेशन पर सप्ताह में दो बार यहां भेजा जाता है।
कून, टोरखोला और भदहेड़ पंचायत के हजारों की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने वाले पीएचसी चोलगढ़ में मरीजों की नब्ज देखने के लिए न तो डाक्टर है और न ही केंद्र चलाने के लिए स्टाफ है। आलम यह है कि दो सालों से पीएचसी में मरीजों का मर्ज पूछने वाला कोई नहीं है। सप्ताह में दो दिन भी पीएचसी का ताला खुलता है। बाकी दिन केंद्र में ताला लगा रहता है। सीएचसी संधोल से एक फार्मासिस्ट को यहां डेपुटेशन पर शुक्रवार और शनिवार को भेजा जाता है। आपातकालीन सेवाओं और मामूली सी तबीयत खराब होने पर मरीजों को संधोल, टिहरा, धर्मपुर और सरकाघाट आना पड़ता है।
स्थानीय निवासी एवं पूर्व प्रधान रूप चंद, मोहर सिंह, कश्मीर सिंह, कैप्टन रमेश चंद, बलवंत सिंह, विधि चंद, जनक राज, संत राम, चतर सिंह, कृष्णा देवी, विद्या देवी और प्रेमी देवी ने कहा कि डाक्टर और अन्य स्टाफ न होने से पीएचसी चोलगढ़ में कोई भी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही। लोगों ने रोष जताया कि मामूली सी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें उपचार के लिए दूसरे क्षेत्रों मेें जाना पड़ता है। दो साल पहले तत्कालीन परिवहन मंत्री एवं धर्मपुर के विधायक महेंद्र सिंह ने पीएचसी केंद्र का शुभारंभ किया था। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि शीघ्र ही पीएचसी में डाक्टर और अन्य स्टाफ की तैनाती की जाए।
बीएमओ डा. संजय कुमार ने कहा कि चिकित्सकों की कमी से पीएचसी चोलगढ़ में समस्या चल रही है। डाक्टर और स्टाफ के रिक्त पदों के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया है।

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