चीनी से मंहगा गुड़ होने के बावजूद सस्ता बिक रहा गन्ना

चीनी से मंहगा गुड़ होने के बावजूद सस्ता बिक रहा गन्ना

मुजफ्फरनगर: यूपी में चीनी से 7 रूपए किलो महंगा गुड़ होने के बावजूद गन्ना सस्ता बिक रहा है। यह गन्ना पिछले साल 280 भाव के मुकाबले 190 रूपए प्रति कुंतल है। 100 रूपए कम प्रति कुंतल कम कोल्हूओं पर औने-पौने दाम पर गन्ना बेचने की वजह गेहूं की बुवाई करना है।

गेहंू की बुआई का आखिरी समय 25 नवम्बर है। किसान गन्ना काट रहा है लेकिन गन्ने की पेराई करने वाली मिलें बंद है और नहीं उनके अभी चलने के आसार है। चीनी की मिलें घाटे का रोना रोते हुए, पिछले साल के यूपी परामर्श मूल्य (एसएपी) 280 रुपये को घटाकर 240 रुपये प्रति कुंतल करने पर अड़ी है।

इसके पीछे उनका तर्क है कि चीनी का भाव 35 रुपये से घटकर 30 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है, जिससे उन्हें लगभग 3,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। वहीं मिलों ने उच्च न्यायालय 4 जुलाई, 2013 आदेश के बावजूद पिछले सत्र का करीब 2,300 करोड़ रुपये एवं ब्याज का बकाया नहीं चुकाया है।

चीनी उद्योग जानकारों के मुताबिक एक कुंतल गन्ने से मिलों को 9 किलोग्राम चीनी, बिजली, खोई, शीरा, एल्कोहल तथा मैली से कुल मिलाकर 400 रुपये की आमदनी होती है। इसमें से 50 रुपये प्रति कुंतल का खर्च यदि निकाल दिया जाए, तो करीब 350 रुपये गन्ना मूल्य देने के लिए बचता है।

यहां सवाल यह उठता है मिल मालिक पेराई शुरू नहीं करते, तो क्या राज्य सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रहेगी, लेकिन कानून तो ऐसा नहीं कहता। उत्तर प्रदेश की तुलना अन्य राज्यों से करें, तो पता चलता है कि वहां के किसानों को गन्ने का ज्यादा मूल्य मिल रहा है।
पिछले साल कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र और कई अन्य राज्यों के किसानों को 260 से 280 रुपये प्रति कुंतल का भाव मिला था।

इसमें कटाई, छंटाई और ढुलाई भी मिल की ओर से दी गई थी। इस तरह इन राज्यों के किसानों को प्रति कुंतल 300 रुपये के हिसाब से मिला। यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार है। उसने अपने घोषणा पत्र में 350 रुपये प्रति कुंतल का भाव देने की बात कही थी। अब अगर वह गन्ने का एसएपी 310-320 रुपये प्रति कुंतल भी घोषित कर देती है, तो उसी दिन कोल्हू वाले 50-60 रुपये प्रति कुंतल तक भाव बढ़ा देंगे, क्योंकि गुड़ महंगा है।

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