
करसोग (मंडी)। करसोग क्षेत्र में करोड़ों की लागत से बना नागरिक चिकित्सालय का भवन किसी काम नहीं आ रहा है। इस नए भवन में अभी तक न तो मरीजों को दाखिल किया जा रहा है और न ही अन्य सेवाएं शुरू हो सकी हैं। आज भी कमरों के दरवाजों पर ताले लटके हुए हैं। यही नहीं विभाग अभी तक नए भवन के लिए बिजली का कनेक्शन भी नहीं ले पाया है। इससे दूरदराज क्षेत्र के हजारों लोगों को दिक्कताें से जूझना पड़ रहा है। अस्पताल का पुराना भवन मरीजों के लिए अपर्याप्त है। अभी पुराने अस्पताल के बरामदे तथा कमरों में ही मरीजों को दाखिल किया जाता है। नए भवन में ओपीडी चल रही है मगर बिजली सप्लाई न होने के कारण मरीजों सहित स्टाफ को दिक्कताें का सामना करना पड़ता है। चिकित्सालय में विशेषज्ञ डाक्टरों की वर्षों से लोग मांग कर रहे हैं पर, सरकार से मंजूरी नहीं मिली है। मात्र 100 बिस्तरों वाले अस्पताल की नोटिफिकेशन ही की गई है। करसोग मंडी से 120 जबकि शिमला से 108 किमी दूर पड़ता है। यहां दुर्गम क्षेत्रों के लोग उपचार के लिए आते हैं, लेकिन विशेषज्ञ डाक्टर न होने के कारण मरीजों को उचित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं। गंभीर अवस्था में मरीजाें को मंडी तथा शिमला रेफर कर दिया जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने नए भवन का उद्घाटन तो कर दिया, लेकिन यहां सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। अस्पताल के चारों ओर गंदे पानी की समस्या पेश आ रही है।
इधर, अनुसूचित जाति एवं जन जाति विभाग के जिला अध्यक्ष मेहर सिह, श्याम वर्मा, मनोज, धनी राम, किशन लाल, राधा रानी, चंपा नेगी, दिला राम, वीके वर्मा ने नए अस्पताल में जल्द सेवाएं बहाली तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती करने की मांग की है। उधर, बीएमओ करसोग डा. अंगरूप दोरजे का कहना है कि बिजली कनेक्शन न होने से समस्या आ रही है। नए भवन में मरीजों को दाखिल नहीं किया जा सकता।
