
शिमला। चार जिला परिषद सदस्यों के विधायक बनने के बाद हिमाचल में इनकी पुरानी सीटों पर घमासान छिड़ गया है। लगभग तीन साल पहले अनिरुद्ध सिंह, पवन काजल, विक्रम सिंह जरियाल और हंसराज जिला परिषद सदस्यों के रूप में चुनकर आए थे। बाद में ये चारों विधायक बन गए, तो ये सीटें खाली हो गईं। छह अक्तूबर को इन सीटों के लिए उपचुनाव हो रहे हैं। सबसे ज्यादा उम्मीदवार अनिरुद्ध सिंह के मशोबरा वार्ड से हैं।
हिमाचल में जिला परिषद के उपचुनाव तीन जिलों शिमला, कांगड़ा और चंबा में चार सीटों के लिए हो रहे हैं। इनमें से शिमला और कांगड़ा से एक-एक, चंबा में दो सीटें खाली हुई हैं। कसुम्पटी के विधायक अनिरुद्ध सिंह शिमला जिला परिषद के चेयरमैन थे। इन्हें कसुम्पटी से कांग्रेस के विधायक बने। उनकी पुरानी सीट खाली हो गई। अब इस पर सात प्रत्याशियों में घमासान है। कांगड़ा के विधायक पवन काजल इससे पहले खोली वार्ड से जिला परिषद सदस्य रहे हैं। उन्होंने विधानसभा की कांगड़ा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और वह भी एमएलए बन गए। अब कांग्रेस के एसोसिएट हो गए हैं। उनके विधायक बन जाने से खाली हुई खोली सीट पर चार प्रत्याशियों में जिला परिषद सीट काबिज करने की जंग छिड़ी है। इसी तरह से जिला चंबा के दो वार्डों पर उपचुनाव हो रहे हैं। चंबा के टुंडी वार्ड से विक्रम सिंह जरियाल जिला परिषद के सदस्य थे, तो उन्होंने भाजपा का टिकट लेकर भटियात निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा का चुनाव जीत लिया। उनके विधायक बनने से खाली हुई इस सीट पर हो रहे उपचुनाव में छह प्रत्याशियों में चुनावी जंग छिड़ी है। चंबा के तीसा के बुंदेड़ी वार्ड से हंसराज जिला परिषद के सदस्य थे। इन्हें भी विधानसभा के लिए भाजपा से टिकट मिला और ये भी चुनाव जीत गए। उनकी पुरानी बुंदेड़ी जिला परिषद सीट पर दो उम्मीदवारों में लड़ाई है।
राज्य चुनाव आयोग के सचिव एसएस गुलेरिया ने बताया है कि पंचायत राज उपचुनाव की पूरी तैयारी कर ली गई है। छह अक्तूबर को वोट पड़ेंगे। प्रचार चार अक्तूबर तक होगा। जिला परिषद सदस्यों की चार सीटोें सहित 206 सीटों पर उपचुनाव करवाए जा रहे हैं। प्रधान, उपप्रधान, पंचायत सदस्यों के स्तर पर तो सर्वसम्मति से भी चुनकर नाम आने लगे हैं। जिला परिषद सदस्यों में मुकाबला होगा
