चार दिन से फंसे लोगों तक नहीं पहुंच रहा अन्न का दाना

पहाड़ में आई आपदा का कोई ओर-छोर नहीं दिख रहा। हर तरफ बर्बादी के मंजर के बीच सेना जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश में जुटी रही। जन-धन के भारी नुकसान के बीच फिलहाल हर कोशिश कम पड़ रही है। केदारघाटी और अन्य जगहों पर फंसे हजारों लोग बुधवार को सुरक्षित निकाले गए। लेकिन हजारों लोग अब भी फंसे हैं।

ताजा खबरों के मुताबिक पांच दिन बाद गंगात्री-ऋषिकेश हाईवे खुल गया है, लेकिन खराब मौसम के चलते उत्तरकाशी और केदारघाटी में रेस्‍क्यू ऑपरेशन प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही बचाए गए लोगों को गुप्तकाशी से टिहरी के रास्ते पहुंचाया जा रहा है। केदारनाथ से बचाए गए 450 लोगों की एक ओर लिस्ट जारी हुई है।

विभिन्न जगहों पर फंसे
इनमें से ज्यादातर चार दिन से भूखे हैं। शासन के मुताबिक ही 62 हजार से ज्यादा लोग अब भी विभिन्न जगहों पर फंसे हैं। हालांकि, सरकारी आंकड़ों की मानें तो मृतकों की संख्या सिर्फ 71 है। दूसरी ओर प्रत्यक्षदर्शियों की ओर से आ रही सूचनाओं के मुताबिक केदारघाटी में जगह-जगह लोगों के शव पड़े हैं। अब भी सैकड़ों लोग लापता है।

रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में भोजन के बिना फंसे लोगों की हालत बिगड़ रही है। सबसे खराब स्थिति केदारघाटी की है। सोनप्रयाग, गौरीकुंड, गुप्तकाशी, फाटा में फंसे सैकड़ों लोगों को चार दिन से खाने के लिए अन्न का एक दाना तक नसीब नहीं हो पाया है। ऐसे में कई लोगों की स्थिति बेहद खराब है। बताया जा रहा है कि गौरीकुंड में फंसे करीब ढाई हजार लोगों में से कई की हालात गंभीर बनी हुई है।

सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 17 किमी क्षेत्र में कई लोग जंगलों में फंसे हैं। एनडीआरएफ की टीम अब तक केदारनाथ नहीं पहुंच पाई है। हालांकि, प्रमुख सचिव राकेश शर्मा के मुताबिक जगह-जगह खाने के पैकेट गिराए गए हैं।

दर्जनों गांव अलग-थलग
उत्तरकाशी में बाढ़ से सड़क, संपर्क मार्ग और पुलों के बहने से गंगा घाटी के दर्जनों गांव अलग-थलग पड़ गए हैं। इन इलाकों में रसद का संकट गहराने लगा है। ऐसे में गंगोत्री हाईवे पर जगह-जगह फंसे चार हजार से ज्यादा यात्रियों के समक्ष भुखमरी की स्थिति है। गंगनानी, सुनगर, डबराणी के ढाबों में राशन खत्म होने पर यात्री जीवन बचाने के लिए निकटवर्ती गांवों में पहुंच रहे हैं।

भैरोंघाटी, झाला, जसपुर, सुक्की, डबराणी, गंगनाणी तथा सुनगर में कही होटल ढाबों में राशन नहीं बचा है। सुक्की गांव में ही 950 से ज्यादा यात्री फंसे हैं। गांव वालों ने पहले तो यात्रियों को गांव में शरण दी, लेकिन अब उनके घर का ही राशन खत्म होने लगा है। यही स्थिति गंगनानी तथा सुनगर की है। गांव वाले यात्रियों को जंगली सब्जियों की पहचान बताकर जीवन बचाने के लिए उन्हें खाने की सलाह दे रहे हैं।

साढ़े पांच हजार यात्री सुरक्षित निकाले गए
बुधवार को रुद्रप्रयाग से 700 लोग, चमोली से 500 और निकाले गए। इन दोनों जगहों से मंगलवार को 2850 यात्री निकाले गए थे। सेना का दावा है कि अब तक साढ़े पांच हजार यात्री सुरक्षित निकाले गए हैं। हजारों स्थानीय लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

दूसरी ओर शासन ने अब तक 22 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का दावा किया है। चमोली जिले में बुधवार को सुबह से ही गढ़वाल स्काउट के जवान राहत, बचाव कार्य में जुट गए। शाम तक बदरीनाथ, पुलना, घांघरिया और गोविंदघाट से करीब 500 तीर्थयात्री और स्थानीय लोगों को जोशीमठ लाया गया।

उधर, रुद्रप्रयाग में शाम छह बजे तक केदारनाथ से लोगों को गुप्तकाशी, फाटा लाया जा रहा था। एनडीआरएफ की दो टीमें भी रुद्रप्रयाग पहुंच गई है। हेलीकाप्टर के जरिए बृहस्पतिवार को प्रभावित क्षेत्रों में ये टीमें उतरेंगी। एनडीआरएफ टीम अस्थाई रास्ते व पुल बनाकर प्रभावितों को गुप्तकाशी तक लाने का काम करेगी। यहां से प्रभावितों को गुप्तकाशी-बसुकेदार-मयाली-घनसाली-टिहरी होते हुए ऋषिकेश पहुंचाया जाएगा।

कहां कितने लोग फंसे
रुद्रप्रयाग में 24,729
चमोली में 26,662
उत्तरकाशी में 9,831
टिहरी में 900

कंट्रोल रूम नंबर
राज्य कंट्रोल रूम, देहरादून
प्रभारी राहुल जुगरान
फोन नंबर (0135)2710334
फैक्स नंबर (0135) 2710335
मोबाइल नंबर (0)9897890981, (0)9152443853

पिथौरागढ़ जिला कंट्रोल रूम
प्रभारी आरएस राना
फोन नंबर (05964) 228052, (05964)226326
मोबाइल नंबर (0)9412079945

चमोली जिला कंट्रोल रूम
प्रभारी नंद किशोर जोशी
फोन नंबर (01372) 251437, (01372) 251077
मोबाइल नंबर (0)9411352136

रुद्रप्रयाग जिला कंट्रोल रूम
प्रभारी मीरा कैंत्थुरा
फोन नंबर (01364) 233727
मोबाइल नंबर (0)9412914875, (0)8859504022

उत्तरकाशी जिला कंट्रोल रूम
प्रभारी देवेंद्र पटवाल
फोन नंबर (01374) 226461
मोबाइल नंबर (0)9675082336
मोबाइल नंबर (0)9410350338

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