
रामपुर बुशहर। भीमा काली मंदिर न्यास के कार्य में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं। यहां दुकानों के आवंटन में चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसे अधिकारी ने दुकानों की लीज डीड बना डाली, जो उसके लिए अधिकृत ही नहीं था। इसके अलावा भी न्यास के अन्य कार्यों में भी भारी गड़बड़ी पाई गई है। यह खुलासा हाल की गई ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है।
धर्मार्थ कार्यों के लिए बनाया गया भीमाकाली मंदिर न्यास का विवादों से नाता नहीं छूट रहा है। हाल ही में किए ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मंदिर न्यास के पूर्व में रहे सहायक मंदिर अधिकारी ने सभी नियमों को ताक पर रखकर कुछ चुनिंदा दुकानों को अपने चहेतों को लीज पर देकर काम पक्का कर दिया है। इसके अलावा मंदिर न्यास के तहत आने वाले अन्य मंदिरों के जीर्णोद्धार पर लाखों के वारे न्यारे किए गए हैं। रिपोर्ट में पाया गया है कि जिस काम के लिए ठेका होता है, उस काम को नियम अनुसार पूरा नहीं किया गया है और समय पर मेजरमेंट बुक भी नहीं भरी गई है। कुछ साल पूर्व में रामपुर के जानकी माई गुफा मंदिर में भी न्यास द्वारा ठेकेदार के माध्यम से जीर्णोद्धार करवाया गया था, लेकिन मंदिर की हालत किसी से छुपी नहीं है। अब जब न्यास का ऑडिट शुरू हुआ तो टीम ने न्यास अधिकारियों को आपत्तियों की लंबी लिस्ट थमा दी है। सूत्रों की मानें तो अगर आपत्तियों पर जांच की जाएगी तो इसमें तत्कालीन अधिकारी, कर्मचारी और ठेकेदार लपेटे में आएंगे, क्योंकि यहां ऐसे कई मामले हैं, जिन्हें फाइलों में ही दबा दिया गया है।
इधर, इस बारे में सचिव भीमा काली मंदिर न्यास बालक राम नेगी का कहना है कि जो भी आपत्तियां लगाई गई हैं, उनकी जांच होगी। उन्होंने कहा कि न्यास में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
