चंपावत में पेयजल संकट और गहराया

चंपावत/लोहाघाट। जिला मुख्यालय के कई मोहल्लों में पेयजल संकट और गहराने लगा है। पेयजल लाइन में पानी की मात्रा बहुत कम हो गई है। हैंडपंप सूखने की स्थिति में आ गए हैं। गर्मी के मौसम में पानी की जरूरत हर घर में 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। मांग और सप्लाई का संतुलन न होने के कारण लगातार समस्या गंभीर होती जा रही है। जल संस्थान के पास इस बार पानी के वितरण के लिए मात्र एक टैंकर है। निजी वाहन स्वामियों ने इस बार पानी ढोने का काम हाथ में लेने से इंकार कर दिया है।
जिला मुख्यालय में हर बार की तरह इस बार भी मई शुरू होते ही पेयजल का संकट गहराने लगा था। प्राकृतिक स्रोतों का स्तर तेजी से कम होना इसकी वजह रही। हैंडपंप सूखने लग गए। जिन स्रोतों से पेयजल योजना के लिए पानी जुटाया जाता है उनमें पानी की कमी होने लग गई। जल संस्थान पिछले एक माह से नगर के तमाम मोहल्लों में एक दिन छोड़कर पानी बांट रहा है। मानसून की बारिश शुरू होने और स्रोतों का स्तर बढ़ने तक यही व्यवस्था रहेगी।
नगर के खर्ककार्की, गोरलचौड़, पूल्ड आवास, शांत बाजार, जीआईसी रोड, कनलगांव इलाके में पानी का संकट ज्यादा गहरा गया है। जल संस्थान ने एक टैंकर के जरिए किल्लत वाले इलाकों में स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इसमें उसे कामयाबी नहीं मिल पा रही है। एकमात्र टैंकर को एक ही बार में सभी किल्लत वाले इलाकों में पहुंचा पाना संभव नहीं है। बताया गया है कि टैंकर को पानी भरकर लाने और वितरित करने में चार घंटे का समय लग रहा है।
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता पीसी करगेती के अनुसार लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसका पूरा ध्यान दिया जा रहा है।
लोहाघाट और आसपास के क्षेत्रों में पीने के पानी का संकट दिनोंदिन गहराता जा रहा है। फोर्ती, ऋषेश्वर ट्यूबवैल के अलावा पाटन ट्यूबवैल का भी जल स्तर कम होने से जल संस्थान के सामने पेयजल की आपूर्ति की समस्या पैदा होती जा रही है। नगर की पूरी आबादी अब चौड़ी लिफ्ट पेयजल योजना पर आश्रित हो गई है। अभी तक विभाग ने केवल अपने विभागीय टैंकरों से ही जलापूर्ति की जा रही है। नगर के स्टेशन बाजार, ऋषेश्वर वार्ड, ठाडाढुंगा के लोगों का कहना है कि उन्हें चौथे दिन भी सही ढंग से पानी नहीं मिल पा रहा है। पाइपलाइनों में टुल्लू पंप लगाए गए जाने से लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। हालांकि जल संस्थान द्वारा ऐसे लोगाें को चेतावनी दी गई है। इसके बावजूद भी यह क्रम थमने का नाम नहीं ले रहा है।

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