
अल्मोड़ा। नंदाष्टमी केअवसर पर अल्मोड़ा में नंदादेवी की पूजा तारा शक्ति के रूप में होती है। यह पूजा तांत्रिक विधि से होती है और चंद शासकों के वंशज ही इस पूजा को कराते हैं। चंद शासकों के वंशज नैनीताल के सांसद केसी सिंह बाबा और उनके परिवारजन नंदाष्टमी के मौके पर परंपरा के मुताबिक तांत्रिक पूजा करवाते हैं।
ज्योतिष, तंत्र और मंत्र तीनों विधाओं से उत्तराखंड का जनजीवन और संस्कृति बहुत प्रभावित रही है। कत्यूरी और चंद राजा तंत्र विद्या में पारंगत माने जाते थे। देवी को युद्ध देवी के रूप में पूजने की परंपरा कत्यूरी और चंद शासनकाल में काफी प्रचलित रही है। स्वर्गीय राजा आनंद सिंह तंत्र विद्या में काफी पारंगत माने जाते थे। जानकारी के मुताबिक उनके निधन के बाद नंदादेवी की पूजा पद्धति में काफी परिवर्तन आ चुका है। आज भी चंद शासकों के वंशज नैनीताल के सांसद केसी सिंह बाबा और उनके परिवारजन नंदाष्टमी के मौके पर परंपरा के मुताबिक तांत्रिक पूजा करवाते हैं। यह पूजा तारा यंत्र के सामने होती है। तारा यंत्र राज परिवार अपने साथ लेकर आता है। यह यंत्र राज परिवार के पास ही है।
शक्ति उपासना के क्षेत्र में तारा को दस महाविद्याओं के बीच दूसरे स्थान पर शोभित किया गया है। ब्रह्मांड पुराण में उनको तारा नाम महाशक्ति कहा गया है। मातृ शक्ति के रूप में उन्हें तारांबा नाम दिया गया है। उन्हें समुद्र की देवी माना जाता है जो जल की गति को नियंत्रित करती है और समुद्र में नाविकों का मार्गदर्शन करती है। उनका श्याम वर्ण है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार तारा को उग्र तारा कहा जाता है। यह माना जाता है कि नंदा-सुनंदा का स्वरूप नंदादेवी की चोटी के स्वरूप से आया।
