
बदरीनाथ धाम तक सड़क खुलने के बाद अब पांच अक्तूबर से फिर विधिवत यात्रा शुरू होगी। यात्रा को लेकर तीर्थयात्रियों में ही नहीं व्यापारियों एवं तीर्थपुरोहितों में भी उत्साह है।
बावजूद इसके कई स्थानों पर हाईवे अब भी खतरनाक बना हुआ है। मौसम भी बार-बार करवटें बदल रहा है। ऐसे में आशंकाओं के बादल भी कम नहीं हैं। हालांकि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधिकारी लगातार हाईवे के निरीक्षण और सुधारीकरण में जुटे हुए हैं। डेंजर जोनों पर 17 जेसीबी भी तैनात हैं।
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हाईवे का पुनर्निर्माण हुआ
16/17 जून को खीरों नदी के उद्गम स्थल पर बादल फटने से बदरीनाथ हाईवे सहित कई गांव तहस-नहस हो गए थे। हनुमान चट्टी से बदरीनाथ (10 किमी) मार्ग कंचन नाला को छोड़कर अन्य जगहों पर सही स्थिति में है।
कंचन नाला में भारी बारिश से करीब 200 मीटर तक मलबा हाईवे पर भर गया था। जिसे अब तक पूरी तरह से नहीं हटाया जा सका है। बैनाकुली से लामबगड़ (सात किमी) तक हाईवे का पुनर्निर्माण हुआ है।
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जिससे यहां वाहनों की आवाजाही जानलेवा बनी हुई है। जेपी बैराज के पास हाईवे पर तीव्र ढलान के बाद खड़ी चढ़ाई बन गई है। जहां पर वाहनों के फंसने व फिसलने का खतरा बना हुआ है।
इन स्थानों पर हाईवे खतरनाक
बिरही, पागल नाला, पाताल गंगा, लामबगड़, जेपी बैराज।
तीर्थयात्रा शुरू होने से व्यापारियों में उत्साह
दो दिन बाद पुन: शुरू हो रही बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा को लेकर मंदिर समिति सहित व्यापारियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बृहस्पतिवार को जल संस्थान के कर्मचारियों ने पेयजल लाइनें दुरुस्त की। माणा गांव के ग्रामीणों में भी यात्रा को लेकर खासा उत्साह है।
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नेयति चैरिटेबल ट्रस्ट ने भी बदरीनाथ में पुन: स्वास्थ्य शिविर शुरू कर दिया है। व्यापारी बचन सिंह नेगी का कहना है कि यात्रा शुरू होने की सूचना से धाम में उत्साह है। माणा गांव निवासी अनिल बिष्ट का कहना है कि गांव में मटर, सेब, आलू की फसल खेतों में तैयार है। जिसे अब ग्रामीण बाजार में उपलब्ध कराने लगे हैं।
मौसम न बन जाए परेशानी का सबब
बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। पिछले एक सप्ताह से दोपहर बाद मौसम खराब हो रहा है। धाम में भी ठंडक बढ़ गई है। यात्रा के दौरान बारिश होने से तीर्थयात्रियों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। हालांकि धाम में ठहरने और खाने-पीने की समुचित व्यवस्था मौजूद है।
