चंडीगढ़ में अपने हिस्से पर दावा नहीं करेगा हिमाचल

शिमला। हिमाचल सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका ऐसा कोई विचार नहीं है कि वह पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के अनुसार चंडीगढ़ में अपने हिस्से के लिए दावा पेश करेगी। भाजपा विधायक रविंद्र रवि के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी गई है।
सरकार की ओर से ऊर्जा मंत्री का कहना है कि सुप्रीमकोर्ट ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से हिमाचल को बढ़े हुए हिस्से का एरियर देने का फैसला 27 सितंबर, 2011 को दिया था। यह सेटलमेंट के लिए अभी सुप्रीमकोर्ट में ही विचाराधीन है। इसके साथ राज्य सरकार चंडीगढ़ में भी बढ़े हुए हिस्से के लिए दावेदारी नहीं करेगी। ये दोनों अलग-अलग मसले हैं। गौरतलब है कि सुप्रीमकोर्ट ने बीबीएमबी के तीन बिजली प्रोजेक्टों में हिमाचल की हिस्सेदारी को 1966 से 2.5 फीसदी से बढ़ाकर 7.19 फीसदी कर दिया था। इसी अनुसार सरकार ने 4250 करोड़ का एरियर केंद्र सरकार से क्लेम किया था। केंद्र ने इस क्लेम को सही न मानते हुए इसे 1450 करोड़ तक सिमटा दिया है। अब हिमाचल सरकार की ओर से दोबारा सुप्रीमकोर्ट में ही जवाब रखा गया है।

हरियाणा मांग सकता है तो हिमाचल क्यों नहीं?
भाजपा विधायक रविंद्र रवि ने कहा कि पंजाब मुल्लांपुर की तरफ न्यू चंडीगढ़ बना रहा है। इस पर हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने चंडीगढ़ को खाली करने की मांग बाकायदा प्रेस वार्ता कर उठाई है। ऐसे में हिमाचल चंडीगढ़ में अपना 7.19 फीसदी हिस्सा क्यों नहीं मांग सकता? यह हक पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के मुताबिक भी हिमाचल को मिलनी थी।

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