घायल दो दर्जन से ज्यादा, बेड थे सिर्फ चार

धर्मशाला। आपातकालीन परिस्थितियों में क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला कितना तैयार है, इसका पता निजी बस हादसे के बाद चला। दर्जनों घायल जब अस्पताल पहुंचाए गए तो यहां मरहम की जगह चीखें सुनाई दे रही थीं। इमरजेंसी में सिर्फ चार बेड थे और घायल दर्जनों। घायल कराहते रहे और तीमारदार घबराते रहे। उपचार के लिए लंबा इंतजार उनकी पीड़ा और बढ़ा रहा था।
धर्मशाला-कुनालपत्थरी-कांगड़ा मार्ग पर कुनालपत्थरी के पास रविवार दोपहर हुए निजी बस हादसे के घायलों को उपचार देने के दौरान क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में अव्यवस्था हावी रही। बस दुर्घटना के ठीक बाद 1:35 बजे 108 नंबर एंबुलेंस क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में घायलों को लेकर पहुंचने लगी। इसके बाद घायलों को अस्पताल लाने का सिलसिला जारी हो गया। एंबुलेंस में पहले आए मरीजों को तो अस्पताल की इमरजेंसी में जगह मिल गई मगर बाद में पहुंचाए गए घायलों को स्ट्रेचर पर ही लेटाना पड़ा। जिससे उनका दर्द और बढ़ गया।
देखते ही देखते अस्पताल परिसर चीखो पुकार से गूंज उठा। इमरजेंसी में सिर्फ चार ही बेड थे। इमरजेंसी में पहले आए घायलों के उपचार के बाद ही दूसरे मरीजों का उपचार होना था। ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए इंतजार करना पड़ा। इस दौरान मरीजों के तीमारदार भी इमरजेंसी के बाहर विलाप करने लगे। बस हादसे में करीब दो दर्जन लोग घायल हुए हैं। इनमें करीब एक दर्जन मरीजों की हालत काफी गंभीर है। गंभीर हालत में पहुंचे कई मरीजों को इलाज के लिए कुर्सियाें पर भी बिठाना पड़ा। तीमारदार भी इमरजेंसी के दरवाजे पर खड़े होकर घायलों का जल्द उपचार होने की राह देख रहे थे। इतना नहीं अस्पताल कर्मियों ने घायलों की हालत को देखते हुए अस्पताल में बने मंदिर में भी घायलों की जल्द स्वस्थ होने की कामना की। वहीं, सर्जिकल वार्ड पहले से ही उपचाराधीन मरीजाें से भरा चल रहा था। ऐसे में मरीजों को वार्ड नं. 3 में शिफ्ट करना पड़ा। उपचार के दौरान स्ट्रेचर की भी कमी खूब खली है। इधर, सीएमओ डा. ध्रुव एस गुरुंग ने बताया कि अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। मरीजों को बेहतर उपचार देने के लिए छुट्टी पर गए डाक्टर भी तुरंत अस्पताल पहुंच गए।

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