घर से बेघर हुए फिर भी दूर नहीं हुई आपदा

रुद्रप्रयाग। 12/13 अगस्त रात की बारिश ने आपदा का प्रकोप झेल रहे लोगाें को फिर भयभीत कर दिया है। जैली गांव में जहां मलबे ने लोगों को फिर बेघर कर दिया वहीं रहड़, ढुंग, पांजणा और पूलन समेत कई गांवों के लोगाें को दोबारा अपने घर छोड़ने पड़ रहे हैं।
सितंबर 2011 में न्याय पंचायत कंडाली की जैली गांव में बारिश के पानी के साथ आए विजयनगर-तैला मोटर मार्ग के मलबे से 35 परिवार बेघर हो गए थे। वर्ष 2012 में भी जैली गांवों ने यही समस्या झेली। लोगों ने किसी तरह दोबारा जीवन जीने की कोशिश की, तो 12/13 अगस्त की रात पहाड़ से आए मलबे ने उन्हें दोबारा बेघर कर दिया। क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्मला बहुगुणा बताती हैं कि जैली गांव को बचाने के लिए प्लान बनाया गया था, लेकिन वह सरकारी फाइलों में कैद होकर रह गया।
पांजणा गांव में वर्ष 1998 में मयाली-गुप्तकाशी सड़क बह गई थी। वर्ष 2007 में यहां भूस्खलन से 12 परिवार प्रभावित हो गए थे। इस बार फिर उनकी जान सांसत में है। कई कमरों के घरों में रहने वाले लोग एक ही कमरे में रह रहे हैं।
पूलन तल्ला बांगर के लोग भी भूस्खलन की समस्या झेल रहे हैं। विजय लक्ष्मी धिरवाण ने बताया कि वर्ष 1952 में भूस्खलन होने पर पूलन के धार तोक के निवासी झांझा तोक में बस गए थे। धार तोक में गोशाला थी, लेकिन सोमवार को धार तोक में जमीन धंसने से रात में मवेशी दूसरी जगह ले जाने पडे़। वहीं पांजणा और जैली गांव के विस्थापन की कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई।
रुद्रप्रयाग तहसील के ढुंग गांव में गत वर्ष भूस्खलन हुआ था। गांव का सर्वेक्षण हुआ, इसके बाद क्या हुआ ग्रामीणों को पता नहीं है। लखपत भंडारी बताते हैं कि गांव के ऊपर से नीचे तक पहाड़ी खिसक रही है। यहां रहे लोगों का जीवन खतरे में है।

Related posts