
शिमला। सबसे अधिक जैव विविधता वाले हिमाचल के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए 3250 बीएमसी (बायो डायवर्सिटी मैनेजमेंट कमेटी) का गठन होगा। राज्य जैव विविधता बोर्ड ने फिलहाल 31 कमेटियों का गठन किया है। प्रदेश की हर पंचायत में एक कमेटी के गठन का लक्ष्य रखा गया है। ये कमेटियां पंचायत स्तर पर जंगलों में पाई जाने वाली जड़ी बूटियों से लेकर पशु व पक्षियों के संरक्षण के लिए कार्य करेंगी।
पंचायत प्रधान सहित गांव का कोई भी महिला व पुरुष इसके सदस्य बन सकते हैं। ये कमेटियां जड़ी-बूटियों के अवैध व्यापार और पशु तस्करों पर भी नजर रखेंगी। गांव विशेष में यदि किसी व्यक्ति व कंपनी की जड़ी बूटियों का व्यापार करना होगा तो इन कमेटियों से लाइसेंस लेना होगा। यह बात जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. एसएस नेगी ने हिपा में बीएमसी प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। मुख्य सचिव सुदृप्त रॉय ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्रत्येक पंचायतों में बीएमसी जैसे ग्रुप की आवश्यकता जताई। इसके अलावा उन्होंने बताया कि जैव विविधता के बारे में जागरूकता और संरक्षण पर जोर देना होगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक दोहन होना चाहिए ताकि प्राकृतिक संतुलन न गड़बड़ाए।
इस अवसर पर सदस्य सचिव डा. एसएस नेगी, संयुक्त सदस्य सचिव डा. हेमंत गुप्ता, हिपा के उपनिदेशक केसी चमन सहित विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ वैज्ञानिक मौजूद रहे। इसके अलावा चौपाल, सिरमौर, बंजार, करसोग, कांगड़ा, सुन्नी, दाड़लाघाट, निचार, बिलासपुर, रोहड़ूू, नगरोटा सूरियां, कुनिहार और कांगड़ा जिलों से आए बीएमसी प्रतिनिधि प्रशिक्षण में शामिल हुए। बीएमसी प्रतिनिधियों को संयुक्त सदस्य सचिव डा. हेमंत गुप्ता, नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सिस के प्रमुख डॉ. जेसी राणा, इंडियन एग्रीकल्चरल रिचर्स इंस्टीट्यूट से डॉ. वाईपी शर्मा के अलावा डॉ. केडी रॉयत, डॉ. केएस कपूर, डॉ. विनीत जिस्टू, डॉ. सुशील सूद और डॉ. एमएल ठाकुर ने विभिन्न विषयों पर वक्तव्य पेश किए।
इनसेट
ऐसे काम करेगी कमेटियां
शिमला। गांव की पंचायत को ही कमेटियों के गठन का अधिकार है। पंचायत ही इसके अध्यक्ष का फैसला करेगी। पांच साल के लिए बनने वाली कमेटियों में दो महिलाओं सहित सात सदस्य होंगे। तीन महीने में एक बैठक होगी और पंचायत में पेड़ पौधे व जीव जंतुओं के संरक्षण में किए जाने वाले कार्यों की समीक्षा होगी। इन कमेटियों के लिए प्रदेश सरकार के अलावा केंद्र व वर्ल्ड बैंक से आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके अलावा गांव में जड़ी बूटियों के व्यापार व अन्य कार्य करने के लिए आने वाली कंपनियां इन कमेटियों को लाभ का 10 फीसदी हिस्सा देंगी।
