

प्रदेश में 30 सड़कें लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों को नए सिरे से बनानी पड़ सकती हैं। इनके सैंपल फेल हो चुके हैं। इनमें तारकोल की मात्रा तय प्रतिशत से कम पाई गई है। इससे ये बारिश में उखड़ सकती हैं।
ठेकेदारों ने पैसा कमाने के चक्कर में तारकोल और अन्य सामग्री की मात्रा कम डाली थी। इसके बाद लोगों ने इसकी शिकायत विजिलेंस से की थी। विजिलेंस ने सड़कों के सैंपल फोरेंसिक लैब में जांच को भेजे थे। फोरेंसिक लैब के सूत्रों के अनुसार इन सड़कों के सैंपल फेल हो चुके हैं।
सिर्फ 2-3 प्रतिशत ही तारकोल डाला

अभी तक करीब 30 सड़कें फोरेंसिक रिपोर्ट में रिजेक्ट हुई हैं। रिपोर्ट को लोक निर्माण विभाग के पास भी भेजा गया है। दर्जनों सड़कों से लिए गए सैंपल में तारकोल 4.5 प्रतिशत से कम पाई गई है। सड़कों में ठेकेदार ने 2 से 3 प्रतिशत तक ही तारकोल डाली है।
तारकोल डालने के बाद बारिश होने पर तारकोल सड़क से उखड़ गई थी। सड़क में गड्ढे भी पड़ गए थे। यकायक उखड़ी सड़कों से लोग दंग थे और इसकी रिपोर्ट अलग-अलग जिलों में विजिलेंस थाना को की थी। वहीं, इंजीनियर इन चीफ नरेश शर्मा ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इतनी सड़कें हो सकती हैं फेल

राज्य फोरेंसिक लैब शिमला के निदेशक डा. अरुण शर्मा और सहायक निदेशक धर्मशाला डा. एसके पाल ने बताया कि 30 सड़कों के सैंपल फेल हो गए थे। सड़कों के सैंपल विजिलेंस विभाग के माध्यम से भी पहुंचे थे। इसकी रिपोर्ट जारी कर दी गई है।
सड़कों से लिए गए सैंपलों में मंडी से 6, सिरमौर से 5, मंडी से 5, शिमला से 6 और कांगड़ा से 8 सैंपल फेल हो चुके हैं। इनकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।
