गेट सिस्टम से मिल सकती है जाम से निजात

भरमौर (चंबा)। पवित्र मणिमहेश यात्रा अगर गेट सिस्टम से शुरू होती है तो जाम की समस्या से निजात मिलेगी। इसके अलावा यात्रा के पड़ावों पर जुटने वाली भीड़ पर भी अंकुश लगाया जा सकता है। जिला मुख्यालय से 88 किलोमीटर दूर स्थित मणिमहेश डल झील में स्नान करने के लिए जाने वाले यात्रियों को जिला मुख्यालय से ही गेट सिस्टम के माध्यम से भेजा जाए तो मणिमहेश यात्रा शांतिपूर्ण तरीके से पूरी होगी। इसके साथ ही जान जोखिम में डाल कर रात के समय जो भक्त यात्रा करते हैं उन पर भी काबू पाया जा सकेगा। इससे स्थानीय प्रशासन को भी यात्रियों की संख्या के बारे में पता चल सकेगा। हाल ही में केदारनाथ में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के बाद जिला प्रशासन पर इससे सबक लेते हुए यात्रा के सफल आयोजन को लेकर बेहतर इंतजाम करने का दबाव बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि मणिमहेश यात्रा 28 अगस्त से 12 सितंबर तक चलेगी। इसमें शाही स्नान जन्माष्टमी और राधाष्टमी के दिन मणिमहेश में काफी भीड़ होती है। स्थानीय प्रशासन और मणिमहेश मंदिर न्यास शाम के छह बजे के बाद मणिमहेश यात्रा को जिला मुख्यालय से नियंत्रित करने की योजना बना रहे हैं। इसके तहत गेट सिस्टम शुरू किए जाने का प्रावधान है। ट्रस्ट की पहली बैठक में इस पर चरचा भी हुई है, मगर यह व्यवस्था कैसे लागू होगी, इस पर निर्णय लिया जाना बाकी है। मणिमहेश यात्रा न्यास की बैठक में एसडीएम डा. जितेंद्र कंवर ने इस मुद्दे को उठाया था। इस पर न्यास के सभी सदस्यों ने सहमति व्यक्त की थी। इस पर प्रस्ताव पारित कर एक प्रतिलिपि सरकार को भेजी है। मणिमहेश यात्रा का भरमौर सबसे प्रमुख पड़ाव है। मणिमहेश यात्रा श्रीगणेश भरमाणी माता मंदिर के दर्शन और स्नान से शुरू होती है। इसके चलते श्रद्धालुओं को एक दिन भरमौर में ठहरना पड़ता है।
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मणिमहेश यात्रा के मुख्य पड़ाव
मणिमहेश यात्रा के दौरान चंबा, भरमौर, हड़सर, धनछो और गौरीकुंड मुख्य पड़ाव हैं। हड़सर तक वाहनों के माध्यम से पहुंचा जाता है। इसके अलावा हड़सर से मणिमहेश 13 किलोमीटर पैदल चढ़ाई चढ़कर डल झील पहुंचना पड़ता है। इसके अलावा धनछो, सुंदरासी, गौरीकुंड और डल झील तक पैदल यात्रा करनी पड़ती है। हड़सर से गौरीकुंड छह किलोमीटर और हड़सर से धनछो छह किलोमीटर, धनछो से गौरीकुंड पांच किलोमीटर और गौरीकुंड से डल झील दो किलोमीटर का सफर है।

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