
धर्मशाला। आईआरबी की द्वितीय वाहिनी सकोह में सेवाएं दे रहे हेडकांस्टेबल ने गुमनाम खतों में एक अधिकारी की प्रेम गाथा को लिखकर शिकायत पत्र मुख्यमंत्री को भेज दिया था। इसके बाद इस मामले में विभाग ने निष्पक्ष जांच भी की है मगर जांच में हेडकांस्टेबल की ओर से लिखी मनगढ़ंत दास्तां झूठी पाई गई। शिकायत में नाम न होने के कारण पुलिस विभाग भी कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ा पाया। अब जैसे ही गुमनाम शिकायतें करने वाले शख्स का पता चला है तो पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए उसे सस्पेंड कर दिया है। अगर विभागीय कार्रवाई जारी रहेगी तो आरोप तय होने पर मुख्य आरक्षी को विभाग नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा सकता है। अभी तक मुख्य आरक्षी की ओर से की गई शिकायतों में कांस्टेबल से लेकर अधिकारियों तक की शिकायतें आला अधिकारियों के पास पहुंची हैं। पहले तो मुख्य आरक्षी कांस्टेबल और इससे ऊपर के रैंकवाले कर्मियों की शिकायतें जिला स्तरीय अधिकारियाें के पास भेजता था। अधिकारियाें की शिकायतें सीधी नेताओं को भेजी जा रही थीं। ऐसे में जांच में तमाम आरोप झूठे साबित हो रहे थे। इससे आईआरबी की द्वितीय वाहिनी में सेवाएं दे रहे तमाम कर्मचारी परेशान थे। बार-बार शिकायतें करने पर कर्मियों से भी पूछताछ की जा रही थी।
ऐसे में कर्मचारी नौकरी करने से भी डर रहे थे। यही नहीं पुलिस अधिकारियों को भी अपनी नौकरी बचाना मुश्किल हो गया था। पुलिस अधिकारी भी बार-बार की जा रही शिकायतों से काफी परेशान थे। कमांडेंट दिवाकर शर्मा ने बताया कि अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगे तमाम आरोप जांच में झूठे साबित हुए हैं। मुख्य आरक्षी के खिलाफ पुलिस अधिकारी जांच कर रहे हैं। रेगुलर विभागीय कार्रवाई के खत्म होने के बाद मुख्य आरक्षी को आरोप तय होने पर नौकरी से हटाया जा सकता है।
