
नहीं। राजधानी शिमला सहित मंडी और कांगड़ा में आधुनिक सुविधाओं से लैस डॉप्लर रडार तेज रफ्तार गाड़ियों पर नजर रखेंगे। करीब साढ़े नौ लाख की कीमत के एक रडार में हाई रेजुलेशन कैमरे और लैपटॉप की सुविधा है। मंगलवार से शुरू होने वाले स्पेशल अभियान में इन लेजर डॉप्लर रडार के इस्तेमाल के निर्देश दिए हैं। विभाग ने इस पर करीब 30 लाख रुपये खर्चे हैं। इसके अलावा गाड़ी की फोटो लेने के दौरान इनके नंबर भी स्पष्ट नजर आएंगे। 10 से 200 मीटर दूरी से आने वाली गाड़ियों की रफ्तार लेजर रडार में दर्ज होगी। अब तेज रफ्तार चालकों को पुलिस से बचना आसान नहीं होगा, जो साधारण डॉप्लर रडार में संभव नहीं है। साधारण रडार की कीमत 1.10 लाख के करीब रहती है। प्रदेश पुलिस के पास 100 से अधिक साधारण रडार हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लेजर रडार में कैमरे की सुविधा होने के कारण वाहन चालक इस बात से इनकार नहीं कर पाएंगे कि तेज रफ्तार चल रही गाड़ी उनकी नहीं है। फोटो और नंबर दोनों आने के कारण पुलिस के लिए चालान करना आसान होगा। आईजी एसआर ओझा ने एक अक्तूबर से अभियान चलाने की पुष्टि की है।
