
उत्तरकाशी। आपदा के बाद सड़क, स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित दूरस्थ गांवों की गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव को स्वास्थ्य महकमे ने कमर कस ली है। बृहस्पतिवार को विभाग की ओर से क्यार्क गांव की एक महिला को सुरक्षित प्रसव कराने के लिए हेलीकाप्टर से जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
16-17 जून की आपदा से सड़क, संपर्क मार्ग बंद होने से जिले के सैकड़ों गांव अलग-थलग पड़े हैं, जिस कारण गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए अस्पताल तक नहीं पहुंच पा रही हैं। पिछले माह ढासड़ा गांव में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत हो गई थी। 20 जुलाई को हिना गांव की एक महिला को पैदल अस्पताल लाते समय अत्यधिक रक्तस्राव होने से अजन्मे शिशु की कोख में ही मौत हो गई। इन दो मौतों के बाद स्वास्थ्य महकमा कुछ हद तक जाग गया है। विभाग ने आशा कार्यकत्री, एएनएम के माध्यम से गांवों में गर्भवती महिलाओं से संपर्क बनाना शुरू कर दिया है। साथ ही हाई रिस्क वाले केसों को हेलीकाप्टर से जिला अस्पताल लाया जा रहा है।
बृहस्पतिवार को क्यार्क गांव की नंदा पत्नी सुनील को भी भटवाड़ी से मातली हेलीपैड पर ला गया। यहां से वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। सीएमओ डा. मयंक उपाध्याय ने बताया कि नंदा की पहली डिलीवरी है। प्रसव की तिथि एक अगस्त है। इससे पहले गत दिनों सुक्की गांव की एक गर्भवती महिला को भी हेलीकाप्टर से जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
