गर्भवती महिलाओं में बढ़ा अनीमिया

बिलासपुर। जननी सुरक्षा एवं मातृ-शिशु सुरक्षा योजना में लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका खास फायदा नहीं दिख रहा। महिलाएं गर्भवती होने के दौरान अनीमिया की चपेट में आ रही हैं। इस तरह की महिलाओं का यह आंकड़ा पिछले वर्ष के मुकाबले तीन गुना बढ़ गया है। असंतुलित भोजन एवं चिकित्सकों द्वारा बताई गई दवाइयां न लेना ही इसका कारण माना जा रहा है। वर्ष 2012-13 की बजाए वर्ष 2013-14 में अनीमिया की चपेट में आने वाली महिलाओं की संख्या तीन गुना अधिक है। इससे स्वास्थ्य विभाग स्वयं चिंतित हो गया है। जिलाभर में 25 गर्भवती महिलाएं अनीमिया से ग्रस्त पाई गई हैं। जिला के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत विभाग की हेल्थ वर्कर को गर्भवती महिलाओं को अनीमिया से बचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। महिला कर्मी स्वास्थ्य केंद्र के तहत आने वाली गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण, विभिन्न बीमारियों से बचने के बचाव, बच्चों के पोषण, संतुलित आहार लेने के बारे में जागरूक करती हैं। पिछले साल जिले में अनीमिया से ग्रस्त महिलाओं की संख्या महज सात थी, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा 25 तक पहुंच गया।

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अनीमिया के बढ़ने के कारणों के बारे में पता लगाया जाएगा। गर्भवती मां के साथ ही नवजात बच्चे को अनीमिया केकारण कई तरह की बीमारियां लगने का खतरा बना रहता है। विभाग ने गर्भवती महिलाओं को इस समस्या से बचाने के लिए हर स्वास्थ्य केंद्र में महिला स्वास्थ्य कर्मी को तैनात किया है।
एम एल कौशल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बिलासपुर।

कैसे बचें अनीमिया से
बिलासपुर। संतुलित खुराक लेने से अनीमिया से बचा जा सकता है। गर्भ के तीन माह उपरांत महिलाओं को आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम की दवाइयां लेने शुरू कर देनी चाहिए। इससे अनीमिया होने की संभावना कम हो जाती है। अनीमिया की कमी से प्रसूति के दौरान अधिक रक्तस्राव से जान खतरे में पड़ सकती है।

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