गढ़वाल मंडल में 1102 एलटी शिक्षक हुए स्थायी

पौड़ी। गढ़वाल मंडल के विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत 1102 एलटी शिक्षकों को शिक्षा विभाग ने स्थायी कर दिया है। इनमें 1019 सामान्य संवर्ग के और 83 महिला संवर्ग के शिक्षक शामिल हैं।
मंडलीय अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा एनएस राणा ने बताया कि विभाग में वर्ष 2002 से पहले से तैनात शिक्षकों का स्थायीकरण कर दिया गया है। मंडल में पुरुष संवर्ग के 1019 शिक्षकों का स्थायीकरण हुआ है, जिनमें पौड़ी जिले के 319, रुद्रप्रयाग के 113, टिहरी के 144, हरिद्वार के 39, उत्तरकाशी के 112, देहरादून के 53 और चमोली के 239 शिक्षक शामिल हैं। एडी ने बताया कि महिला संवर्ग में 83 शिक्षकों का स्थायीकरण किया गया है, जिनमें रुद्रप्रयाग के चार, टिहरी के 12, हरिद्वार और चमोली के नौ-नौ, पौड़ी के 37, उत्तरकाशी और देहरादून के छह-छह शिक्षक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कुछ शिक्षकों के आवेदन अपूर्ण होने के कारण उनके स्थायीकरण की कार्रवाई नहीं हो पाई है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों का स्थायीकरण दो साल में हो जाता है लेकिन शिक्षकों को स्थायी करने संबंधी रिपोर्ट जिलों से देर से मिली जिस कारण इनके स्थायीकरण में देरी हुई है।

हाईकोर्ट ने दिया अंशकालिक शिक्षकों को झटका
श्रीनगर। हाईकोर्ट नैनीताल ने एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में समायोजन की लड़ाई लड़ रहे अंशकालिक शिक्षकों की याचिका खारिज कर दी गई है। इससे अंशकालिक शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है।
एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के अंशकालिक शिक्षक समायोजन के लिए लंबे समय से आंदोलनरत हैं। मामले में वादी डा. राजेंद्र सिंह रावत और डा. नरेंद्र सिंह चौहान ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। इसमें कुलपति एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय और अन्य को प्रतिवादी बनाया गया था। चीफ जस्टिस बारिन घोष और जस्टिस यूसी ध्यानी की बेंच ने 19 अगस्त को इस मामले में फैसला दिया है। इसके मुताबिक विश्वविद्यालय अब केंद्रीय दर्जा पा चुका है। इसलिए उस पर यूपी स्टेट यूनिवर्सिटी एक्ट 1973 की धारा 31(3)(ष्) लागू नहीं होती। इसलिए हाइकोर्ट विश्वविद्यालय के मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

150 से ज्यादा अंशकालिक शिक्षक होंगे प्रभावित
श्रीनगर। गढ़वाल विश्वविद्यालय के तीनों परिसरों में डेढ़ सौ से ज्यादा अंशकालिक शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से कई शिक्षक तो ढाई दशक से सेवाएं दे रहे हैं। लंबे समय से समायोजन की मांग कर रहे अंशकालिकों की आवाज संसद और राज्यसभा में भी उठाई जा चुकी है। मगर अब इनके भविष्य पर प्रशभनचिह्न लग गया है।
गढ़वाल विश्वविद्यालय के अंशकालिक शिक्षक लंबे समय से समायोजन की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। इन्होंने खुद को यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2009 से अलग रखने की भी मांग की है। पूर्व में गढ़वाल विश्वविद्यालय में प्री पीएचडी की व्यवस्था न होने के कारण 2009 से पहले के पीएचडी धारकों को इस रेगुलेशन के कारण परेशानियां हैं। अपनी इन्हीं मांगों को लेकर अंशकालिक शिक्षकों ने कुछ ही दिन पहले मानव संसाधन विकास मंत्री एमएस पल्लमराजू से भी मुलाकात की थी। सांसद सतपाल महाराज और राज्यसभा सांसद भगत सिंह कोश्यारी भी सदनों में अंशकालिक शिक्षकों की बात उठा चुके हैं।
विश्वविद्यालय के तीनों परिसरों में इस समय 154 अंशकालिक शिक्षक हैं। सेल्फ फाइनेंस कोर्सों के शिक्षकों को मिलाकर यह संख्या 170 के करीब पहुंच जाती है। इनमें से कुछ लोग तो करीब 25 सालों से विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रहे हैं। मगर हाइकोर्ट के निर्णय के बाद इन शिक्षकों की राह मुश्किल नजर आने लगी है।

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