
उत्तरकाशी। आपदा को तीन माह बीत गए लेकिन गंगोत्री में साधनारत साधु-संतो को रसद के नाम पर अभी तक सिर्फ 15-15 किलो चावल, आधा किलो मूंग दाल, एक-एक लीटर मिट्टी तेल तथा कुछ को दो-दो किलो आटा ही मुहैया कराया जा सका है। गंगोत्री हाईवे अभी तक खुला नहीं है। ऐसे में रसद के लिए संत 30-40 किमी पैदल चल कर उत्तरकाशी तक पहुंचने को मजबूर हैं।
जून की आपदा के दौरान गंगोत्री में फंसे हजारों तीर्थयात्रियों को तो निकाल लिया गया, लेकिन पूजा-अर्चना जारी रखे तीर्थ पुरोहितों तथा साधनारत साधु संतों की प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली। अभी भी गंगोत्री में करीब 250 लोग रह रहे हैं। इनके अनुसार तीन महीनों में उन्हें थोड़ी रसद को छोड़कर कोई मदद नहीं दी गई। संकट गहराता जा रहा है।
कुछ लोग तो गंगोत्री मंदिर में चल रहे लंगर में भोजन कर रहे हैं, जबकि कई रसद के लिए मीलों पैदल चलकर उत्तरकाशी पहुंचने को मजबूर हैं। रसद, ईंधन के लिए यहां पहुंचे गंगोत्री के संत राजाराम दास जब डीएम से मिलने पहुंचे तो डीएम डा.पंकज पांडेय ने उन्हें शासन से मिला राशन और 700 लीटर मिट्टी तेल गंगोत्री भेजे जाने की जानकारी देते हुए बैरंग लौटा दिया।
कोट………
आपदा के बाद से अलग-थलग पड़े गंगोत्री धाम के प्रति सरकार उपेक्षित रवैया अपना रही है। केदारनाथ में पूजा शुरू कराने के नाम पर करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन गंगोत्री में रह रहे लोगों की सरकार कोई सुध नहीं ले रही है।
स्वामी अनिल स्वरूप ब्रह्मचारी, सचिव साधु सभा गंगोत्री।
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गंगा के प्रति आस्था के चलते श्रद्धालु गंगोत्री आने के इच्छुक हैं, लेकिन राजमार्ग अवरुद्ध होने के कारण यात्री गंगोत्री नहीं पहुंच पा रहे हैं। यहां रसद और ईंधन का संकट भी गहरा गया है। सरकार सिर्फ राजमार्ग पर यातायात बहाल करा दे, व्यवस्थाएं स्वयं पटरी पर आ जाएंगी।
सुरेश सेमवाल, सचिव गंगोत्री मंदिर समिति।
