
हरिद्वार। लोग युवा संन्यासी निगमानंद को गंगा पुत्र कहते थे। उन्होंने अपने पुत्र होने का दायित्व भी बखूबी निभाया। मां की रक्षा के लिए जान दे दी। मातृसदन के संत स्वामी निगमानंद सरस्वती की आज दूसरी पुण्यतिथि है। 13 जून 2011 को जौलीग्रांट अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली थी। निगमानंद ने जिस उद्देश्य के लिए प्राणों की बाजी लगाई थी, उसकी पूर्ति होना अभी बाकी है। निगमानंद के बलिदान के बाद भी खनन माफिया गंगा का सीना चीरने में लगे हैं।
मातृसदन में 28 जनवरी 2011 को स्वामी निगमानंद के गुरुभाई ब्रहमचारी यजनानंद ने अनशन शुरू किया था। लेकिन 19 फरवरी 2011 को स्वामी निगमानंद सरस्वती ने गुरुभाई का अनशन तुड़वा दिया। गंगा और पर्यावरण की रक्षा के लिए उन्होंने स्वयं को आगे किया। स्वामी निगमानंद का यह अनशन अंतिम सांस तक चला। मरते दम तक उन्होंने मुंह से कुछ नहीं लिया। जीवन के अंतिम दिनों में स्वामी निगमानंद कोमा में चले गए थे। 13 जून 2011 को जौलीग्रांट अस्पताल में उन्हाेंने दम तोड़ दिया। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने स्वामी निगमानंद की मौत को साजिशन हत्या बताया था।
गंगा की रक्षा के लिए स्वामी निगमानंद ने तो जान की बाजी लगा दी लेकिन खनन माफिया अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। उनकी मौत पर देशभर में हल्ला मचा तो खनन माफिया कुछ दिन के लिए बिल में घुस गया। लेकिन जैसे ही मामला शांत हुआ फिर से गंगा में अवैध खनन शुरू हो गया, जो बदस्तूर जारी है। पुलिस और प्रशासन की टीम हर रोज छापे मारती है और अवैध खनन में कई वाहन पकड़े जाते हैं। परंतु अवैध खनन पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पाई है।
कभी नहीं भुला सकते युवा संन्यासी का बलिदान
– स्वामी निगमानंद ने गंगा में अवैध खनन के खिलाफ संघर्ष करते हुए प्राणों की आहुति दे दी। उनके उद्देश्य की पूर्ति के लिए मातृसदन लगातार कार्य करता रहेगा। मातृसदन उस युवा संन्यासी के बलिदान को कभी नहीं भुला सकता। अमर शहीद की पुण्यतिथि पर गंगा को बचाने के लिए स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद तपस्या पर बैठ रहे हैं। यह परंपरा यूं ही चलती रहेगी।
– स्वामी शिवानंद सरस्वती, परमाध्यक्ष मातृसदन (यह सब बताते हुए स्वामी शिवानंद की आंखें छलक आई थी)
कब क्या हुआ
19 फरवरी 2011- कुंभ क्षेत्र को खनन मुक्त करने की मांग लेकर मातृसदन में अनशन पर बैठे स्वामी निगमानंद
27 अप्रैल- प्रशासन ने जिला चिकित्सालय में कराया भर्ती, फोर्स फीडिंग कराई
2 मई- हालात बिगड़ने पर चिकित्सकों ने निगमानंद को हायर सेेंटर किया रैफर
6 मई- मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने जिला चिकित्सालय में निगमानंद को जहर देने का आरोप लगाया।
13 जून- जौलीग्रांट अस्पताल में स्वामी निगमानंद की मौत
16 जून- स्वामी निगमानंद की पार्थिव देह को दी गई भू समाधि।
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2008 में 72 दिन का किया था अनशन
स्वामी निगमानंद का यह कोई पहला अनशन नहीं था। इससे पहले भी निगमानंद कई अनशन कर चुके थे। वर्ष 2008 में उन्हाेंने 72 दिन तक अनशन किया था। तब प्रशासन ने उनकी कई मांगें मान ली थी और निगमानंद ने 72 दिन बाद एक अप्रैल 2008 को अनशन तोड़ दिया था। 2007 में वह सात दिन अनशन पर रहे थे। 30 मार्च 2007 को प्रारंभ हुआ उनका अनशन पांच अप्रैल तक चला था। तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री और मौजूदा शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया था।
