खुद का कार्यालय गंदा तो कैसे साफ होगा शहर

हल्द्वानी। शहर को साफ-सुधरा करने का दावा करने वाला नगर निगम जब खुद अपने दफ्तर की सफाई नहीं कर सकता, तो उससे शहर की गंदगी साफ करने की उम्मीद करना ही बेमानी है। निगम कार्यालय का बुरा हाल है। शौचालय तो दूर कार्यालय कक्षों में गंदगी बजबजा रही है। शौचालयों की महीनों से सफाई नहीं हुई है। शौचालयों की दुर्गंध से पूरा कार्यालय बदबू मारता है। कर्मचारियों ने कार्यालय कक्षों के कोनों को ही पीकदान बना डाला है। नगर निगम की इस हालत से अफसर और मेयर साहब बेखबर हैं, क्योंकि दोनों लोग न तो इन शौचालयों का इस्तेमाल करते हैं और ना ही कार्यालयों कक्षों का निरीक्षण करते हैं।
शहर की सफाई व्यवस्था और सौंदर्यीकरण का जिम्मा नगर निगम के हाथों में है, लेकिन निगम खुद ही बदबू मार रहा है। निगम के पास सफाई कर्मियों की बड़ी फौज है। सफाई कर्मी अपने ही कार्यालय की सफाई नहीं करते हैं। तीन मंजिला निगम कार्यालय के हर मंजिल में शौचालय बने हैं। मेयर और मुख्य नगर अधिकारी के कार्यालय कक्षों से अटैच शौचालय हैं। निगम के बाकी अधिकारी एवं कर्मचारी हर मंजिल में बने सार्वजनिक शौचालयों का ही इस्तेमाल करते हैं। निगम कार्यालय के सार्वजनिक शौचालय बाजार क्षेत्र के सार्वजनिक शौचालयों से बुरी हालत है। शौचालयों में अब तक पानी की सप्लाई ही नहीं है, जिससे टायलेट की सीटें गंदगी से भरी पड़ी हैं। यहां से उठने वाली दुर्गंध पूरे निगम कार्यालय में फैलती है।
निगम कार्यालय में हिंदुस्तान का सबसे बड़ा पीकदान बंद कराए जाने के बाद कर्मचारियों ने अब अपने कार्यालय कक्षों के कोनों को ही थूकदान बना डाला है। अधिकतर कार्यालय कक्षों के कोने पीक से लाल हो गए हैं। बेसमेंट को जाने वाली सीढ़ियों के कोनों को कूड़ादान बना दिया है। इससे निगम पहुंचने वाले बाहरी लोगों को नाक बंद कर प्रवेश करना पड़ता है।

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